भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य परिषद के दो दिवसीय सम्मेलन का समापन ; शिक्षा और बेरोजगारी के मुद्दे पर गरजी पार्टी

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CHHAPRA DESK  –  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का आज विधिवत समापन हो गया. सम्मेलन में राज्यभर से आए प्रतिनिधियों एवं पार्टी नेताओं ने शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, लोकतंत्र और शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. सम्मेलन के दौरान सारण एवं तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय भी लिए गए. सम्मेलन में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि आगामी शिक्षक निर्वाचन चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भाजपा के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ेगी.

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विद्यासागर विद्यार्थी होंगे उम्मीदवार

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वरिष्ठ शिक्षक नेता एवं वामपंथी विचारधारा के प्रतिबद्ध कार्यकर्ता कामरेड विद्यासागर विद्यार्थी को संभावित प्रत्याशी बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव पारित होते ही सम्मेलन स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन जताया. दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ गिरीश शर्मा ने केंद्र सरकार की आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है, लेकिन केंद्र सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी हुई है. डॉ शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा का निजीकरण तेज किया जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों का उच्च शिक्षा तक पहुंचना कठिन होता जा रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के बजाय शिक्षा संस्थानों को कमजोर करने में लगी है. उन्होंने कहा कि आज देश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है. लाखों पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने में गंभीर नहीं दिखती. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. पेट्रोल-डीजल, खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से गरीब एवं मध्यम वर्ग परेशान है. राष्ट्रीय सचिव ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वामपंथी दलों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.

उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया. सम्मेलन में उपस्थित नेताओं ने कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षा, शिक्षकों के अधिकार, पुरानी पेंशन योजना, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा नियोजित शिक्षकों की समस्याएं प्रमुख मुद्दे होंगे. नेताओं ने दावा किया कि शिक्षक और बुद्धिजीवी वर्ग भाजपा सरकार की नीतियों से नाराज हैं और बदलाव का मन बना चुके हैं. कामरेड विद्यासागर विद्यार्थी के नाम पर प्रस्ताव पारित होने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया.

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वक्ताओं ने कहा कि विद्यासागर विद्यार्थी लंबे समय से शिक्षक हितों और सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं तथा उनका संघर्षशील व्यक्तित्व उन्हें मजबूत उम्मीदवार बनाता है. सम्मेलन के समापन सत्र में पार्टी नेताओं ने संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने का संकल्प लिया. साथ ही शिक्षा, रोजगार और लोकतंत्र बचाने के लिए व्यापक जनआंदोलन चलाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई. दो दिवसीय सम्मेलन में राज्य परिषद के कई वरिष्ठ नेताओं जिसमें राष्ट्रीय सचिव संजय कुमार, पूर्व एमएलसी सह राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरेंद्र सौरभ, अजय कुमार सिंह प्रमोद, मुखिया वीरेंद्र शाह एवं प्रमोद प्रभाकर सहित शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. सम्मेलन के समापन पर संघर्ष तेज करने और आगामी चुनाव में मजबूती से उतरने का आह्वान किया गया.

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