अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में बिना हथियार के हो रही मरीजों से लूट ; अस्पताल का रजिस्ट्रेशन और डिग्री दोनों नदारद

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CHHAPRA DESK – सारण जिले के छपरा शहर से लेकर गांव-गांव तक कुकुरमुत्ते की तरह सैकड़ो नर्सिंग होम और पैथोलॉजिकल जांच केंद्र खुल गये हैं. जिनपर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कोई अंकुश नहीं है. हालांकि इसको लेकर दोनों विभाग की एक संयुक्त टीम बनी है, लेकिन जांच टीम के उपेक्षा पूर्ण रवैया के कारण गली-गली में कुकुरमुत्ते की तरह नर्सिंग होम और पैथोलॉजिकल जांच केंद्र उगे हैं. जिनके द्वारा मरीजों का आर्थिक और शारीरिक दोनों रूप से शोषण किया जा रहा है या यूं कहें कि उनसे इलाज के नाम पर लूट की जा रही है. अगर ऐसे नर्सिंग होम की जांच की जाए तो ना तो उनके पास कोई रजिस्ट्रेशन होता है और ना ही उनके पास कोई वैध डिग्री होता है.

ऐसे अधिकांश नर्सिंग होम कंपाउंडरों के द्वारा या दलालों के द्वारा ही चलाया जा रहा है. वही आपको धोखा देने के लिए उनके बोर्ड पर दर्जनभर चिकित्सकों के नाम दिख जाएंगे. लेकिन, हंगामा होते ही बोर्ड और बैनर पोस्टर सब कुछ गायब कर दिया जाता है. ऐसे अनेक मामले छपरा शहर से लेकर गांव तक सामने आ चुके हैं. ऐसा ही एक नर्सिंग होम छपरा शहर राजेंद्र स्टेडियम से पीछे है ए-वन इमरजेंसी हॉस्पिटल. जोकि, इससे पहले कभी जयश्री इमरजेंसी हॉस्पिटल तो कभी ओम नारायण इमरजेंसी हॉस्पिटल के नाम से संचालित होता था. पकड़े जाने के बाद अब इसका नाम बदल चुका है.

पुनः ताजा मामला छपरा सदर अस्पताल से शुरू हुआ है. जहां बीती संध्या एक मरीज 14 वर्षीय अर्जुन कुमार को गिरने के कारण नाक में जख्म होने पर सदर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां से उक्त नर्सिंग होम का दलाल उसे लेकर वहां पहुंचा दिया. जहां रात भर में उसे मरीज को ₹20000 का बिल थमा दिया गया. तब मरीजों को समझते देर नहीं नहीं कि वह फंस चुके हैं और उन लोगों ने जब मरीज को डिस्चार्ज करने की बात की तो बात ₹20000 अटक गई. काफी आरज़ू-मिन्नत और हाथ-पैर जोड़ने के बाद जब बात नहीं बनी तो उस गरीब मरीज के परिवार वालों ने एसपी को आवेदन देने की बात कही और इसकी सूचना पत्रकार को भी दी गई. जिसके बाद मामला ₹9000 में रफादफा किया गया. जिसके बाद मरीज पुनः सदर अस्पताल पहुंचा और फिलहाल सदर अस्पताल में उस मरीज का उपचार चल रहा है.

 

मरीज के परिजनों ने कहा ₹20000 के लिए मरीज को बनाया गया था बंधक

मामला रफा दफा होने के बाद मरीज के परिजन जब पुन: सदर अस्पताल पहुंचे तो उन लोगों ने हलचल न्यूज़ को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनकी पहल पर ₹9000 में मरीज को मुक्त किया गया नहीं तो नर्सिंग होम संचालक चंदन ₹20000 के लिए उन लोगों को काफी टॉर्चर कर रहे थे.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

इस मामले में पूछे जाने पर छपरा सदर अस्पताल सिविल सर्जन डॉक्टर सागर दुलाल सिंह ने कहा कि फर्जी तरीके से संचालित नर्सिंग होम एवं पैथोलॉजिकल जांच पर अंकुश लगाने को लेकर जिला प्रशासन के साथ एक संयुक्त टीम बनी हुई है. उसी टीम के द्वारा कार्रवाई की जानी है. वही अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार किया है.

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