अनिश्चितकालीन हड़ताल के तीसरे दिन 102 एंबुलेंस कर्मियों ने प्रदर्शन जुलूस निकालकर सिविल सर्जन का किया घेराव ; अब डीएम कार्यालय का होगा घेराव

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CHHAPRA DESK —बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर 102 एंबुलेंस कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के तीसरे दिन सदर अस्पताल से एक प्रदर्शन जुलूस निकाला, जो कि अस्पताल के बाहर कुछ कदम तक नारेबाजी करने के बाद पुनः अस्पताल परिसर में गया, जहां उन लोगों के द्वारा सिविल सर्जन का घेराव किया गया. हालांकि सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा के द्वारा सार्थक पहल किए जाने से एंबुलेंस कर्मी खुश नजर आए. इस मौके पर एंबुलेंस महासंघ के प्रदेश संयोजक मोबस्सीर हुसैन ने बताया कि जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव सिविल सर्जन के द्वारा उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया गया है. जिससे वह काफी संतुष्ट है. अब उनके द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल के तीसरे चरण में जिला स्वास्थ्य समिति के पदेन अध्यक्ष सारण डीएम अमन समीर के कार्यालय का घेराव कर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा. बता दें कि अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर 102 एंबुलेंस चालक व ईएनटी कर्मियों ने छपरा सदर अस्पताल में धरना पर बैठे हैं.

सभी एंबुलेंस चालक गाड़ियों को सदर अस्पताल परिसर में खड़ा कर कर 102 एंबुलेंस सेवा को पूरी तरह ठप्प कर रखा है. आज प्रदर्शन जुलूस के दौरान उनके द्वारा नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. एंबुलेंस महासंघ के प्रदेश संयोजक ने बताया कि हमलोग अपने चार सूत्री मांगों में बकाया राशि का मान देय भुगतान, ई एस आई व पी एफ की राशि अविलम्ब भुगतान करने, सभी कर्मचारियों का समायोजन नई सेवा प्रदाता में अविलम्ब सुनिश्चित करने, एवं श्रम अधिनियम के तहत मानदेय का भुगतान करना सुनिश्चित करने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता है तब तक उन लोगों का आंदोलन जारी रहेगा और प्रतिदिन यह आंदोलन उग्र होता जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही सरकार की होगी. प्रदर्शन जुलूस में सैकड़ो की संख्या में एंबुलेंस कर्मी शामिल थे.

मरीजों को हो रही परेशानी

बता दें कि राज्यव्यापी हड़ताल के तहत 102 एंबुलेंस कर्मी सारण में भी तीन दिनों से हड़ताल पर है. जिसके कारण 102 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह ठप्प हो गई है और ऐसी स्थिति में जिले से रेफर किए जाने वाले मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है और इस सेवा के लिए उन्हें महंगे शुल्क भी अदा करने पर रहे हैं. जिसको लेकर गरीब मरीजों में जहां आक्रोश है वही बेहतर चिकित्सा के लिए पटना रेफर किए जाने के बाद भी वे पैसे के अभाव में रेफर नहीं जा पा रहे हैं.

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