उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ व्रत अनुष्ठान संपन्न

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CHHAPRA DESK – सारण जिला के कोठियां नराव स्थित प्रसिद्ध मनोकामना सिद्ध सूर्यनारायण मन्दिर पर छठ महापर्व अनुष्ठान उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ. नहाय-खाय से शुरु लोक महापर्व छठ के अवसर पर सारण के इकलौते उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर पर पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भीं विशेष रौनक देखने को मिली. व्रतियों ने सूर्य कुण्ड में भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पण करने के बाद सूर्यमन्दिर मे भगवान भुवन भाष्कर को दुग्ध और जल से अभिषेक कर मन्दिर की परिक्रमा की. जिसके बाद कथा श्रवण कर मन्दिर मे दान-पुण्य कर संत महात्माओ से आशीर्वाद प्राप्त कर हर्षोल्लास के साथ घर लौटे.

इस मैं में दर्जनो व्रतियों ने सूर्य मन्दिर पर रखे मनोकामना के पूरा होने पर वहां तीन दिनों तक रात्रि विश्राम करके व्रत को संपन्न किया. बता दे कि इस ऐतिहासिक सूर्य मंदिर पर देश के कोने-कोने से लोग छठ व्रत करने के लिए आते हैं. छत्तीसगढ के भिलाई से आई रंगा देवी ने बताया कि हमने औलाद के लिए सूर्य मन्दिर पर मन्नत रखी. जिसके पूरा होने पर यहां व्रत करने आई हूं. दिघवारा प्रखंड के सीतलपुर से आए उषा देवी ने भीं पुत्र प्राप्ति होने पर छठ किया. सदर प्रखंड से आई रंजु देवी ने भी औलाद की प्राप्ति पर व्रत किया. वही मुन्नी देवी अपने बेटे की सरकारी नौकरी हेतु मन्नत रखी थी,

जिसकी पूर्णता के बाद वे व्रत की. वही डोरीगंज थानाक्षेत्र के बलुआ से आई अनीता देवी व रुबी देवी ने अपने दो-दो बच्चो को बोर्ड परीक्षा मे प्रथम आने की मनोकामना पूरी होने पर छठ की. सीतलपुर निवासी कमल देवी ने बताया कि हमारे बच्चे की तबीयत ठीक नहीं हो रही थी जब हम यहां आकर मन्नत रखे तो दवा और मन्नत से बच्चा ठीक हो गया. इसलिए यहां व्रत की हूं. सोनपुर के किस्मातो देवी ने बताया कि हमारे बच्चे के लिए हमारी ननद ने स्वस्थ होने की मन्नत रखी थी. अब मेरा बेटा बिल्कुल ठीक हो गया तो मै अपने ननद द्वारा रखे मन्नत को उतारने के लिए सूर्य मन्दिर पर छठ करने आई हूं.

इस तरह से अन्य दर्जनो व्रतियो ने मनोकामना पूरा होने पर सूर्य मन्दिर पर रात्रि विश्राम कर घाट सेवन करते हुए व्रत रखा और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण कर कथा-पूजन के बाद घर लोटे. सूर्यनारायण मन्दिर सेवा समिति एवं प्रबंधन समिति कोठिया-नरांव के सदस्यों ने व्रतियों, दूर दराज से आए पर्यटको और सूर्य नारायण के भक्तो के सेवा मे सदैव तैनात दिखे. दूर दराज के व्रतियों के परिजन व पर्यटको के लिए शीतल पेय जल, चाय व रात्रि भंडारे का उत्तम प्रबन्ध किया गया था.

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