उद्घाटन के पहले दिन ही 6:30 घंटे लेट पहुंची छपरा-आनंद विहार सुपरफास्ट ; प्रारंभ में यात्रियों ने किया इंजॉय बाद में बना परेशानी का सबब

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CHHAPA DESK –  बड़े जोर-शोर से उद्घाटन के बाद रवाना की गई छपरा-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन (02527) अपने पहले ही सफर में पटरी पर फिसलती नजर आई. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुरू की गई यह ट्रेन दिल्ली पहुंचने में करीब 6:30 घंटे लेट हो गई. जिससे रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं. यात्रियों में इस बात की खुशी जरूर दिखी कि उद्घाटन यात्रा में किराया नहीं लिया गया. इसके साथ ही रास्ते में बिस्किट, नमकीन, चाकलेट, पानी व कोल्ड ड्रिंक भी यात्रियों को निशुल्क उपलब्ध कराया गया. लेकिन, यह राहत लंबी देरी के सामने फीकी पड़ गई. भीषण गर्मी के बीच जनरल और स्लीपर कोच में सफर कर रहे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. पानी, हवा और समय तीनों की कमी ने सफर को कष्टदायक बना दिया.

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इसके साथ ही ट्रेन में कोई पेंट्री कार नहीं था. शाम के बाद उन यात्रियों को भोजन के लिए भी सोचना पड़ गया, जो भोजन नहीं ले गये थे. हालांकि एसी का भी पास निशुल्क दिया गया था. उन यात्रियों को तो खास परेशानी नहीं हुई लेकिन ट्रेन का विलंब सबको सता गया. इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्री आकाश कुमार, डोली श्रीवास्तव, रिंकी कुमारी, विकास कुमार, अजय प्रसाद, स्नेहा कुमारी आदि यात्रियों ने हलचल न्यूज़ को बताया कि दिल्ली पहुंचने के बाद सुबह उन्हें आवश्यक कार्य से लेकिन ट्रेन काफी विलंब होने के कारण उनका काम नहीं हो पाया. वहीं विलंब होने के कारण खासी परेशानी इसलिए भी हुई कि ट्रेन अधिक समय आउटर पर ही रुकती थी, जिसके कारण उन्हें चाय-नाश्ता या कुछ भी नहीं मिल पा रहा था.

वही एक व्यक्ति का नियमित चेकअप के लिए दिल्ली आना हुआ था लेकिन उनका अपॉइंटमेंट कैंसिल हो चुका था. ट्रेन की देरी के कारण वे समय पर नहीं पहुंच सके. नतीजतन उन्हें डॉक्टर का अपॉइंटमेंट दोबारा लेना पड़ा, जिससे न सिर्फ समय बल्कि पैसे की भी अतिरिक्त मार झेलनी पड़ी. ऐसे कई यात्री रहे जिनके जरूरी काम इस देरी की भेंट चढ़ गए. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उद्घाटन के दिन ही ट्रेन 6:30 घंटे विलंब से पहुंचती है, तो सामान्य दिनों में इसकी समयबद्धता कैसी रहेगी. तब, जबकि केंद्रीय रेल मंत्री के द्वारा ही हरी झंडी दिखा कर इसे वाना किया गया. रेलवे द्वारा नई सेवाओं की घोषणा तो तेजी से की जाती है, लेकिन संचालन में लापरवाही बार-बार उजागर हो रही है. वैसे रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनों के नाम पर यात्रियों से 30% से अधिक किराया की वसूली की जा रही है, जबकि सुविधा बिल्कुल ही नदारद मिल रही है और ऊपर से 6 से 8 घंटे का विलंब यात्रियों को खल जा रहा है.

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