ट्रेन के गेट पर बैठना या खड़े होना कितना खतरनाक ; एक सप्ताह में दूसरी मौत ; किसी की पहचान नहीं

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CHHAPRA DESK –    ट्रेन के गेट पर बैठना या खड़े होना कितना खतरनाक है कि दुर्घटना के बाद अगर पहचान नहीं हो तो मौत भी निश्चित है. वैसे लोगों को ना तो मुखाग्नि नसीब होती है और ना ही कब्र मिलता है. क्योंकि वैसे अज्ञात के उपचार या शवों को जलाने या दफनाने का कोई बजट नहीं होता. ना तो उसे सही उपचार मिलता है और ना ही मुक्ति. बता दें कि छपरा में एक सप्ताह के अंदर एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो चुकी है. जबकि, दूसरा भी जिंदगी और मौत से जुड़ते हुए मौत के कगार पर पहुंच गया और अंततः मौत हो गई. आज छपरा जंक्शन के पश्चिमी रेलवे ढाला संख्या 53 पर किसी ट्रेन से गिरकर 35 वर्षीय एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है जिसे रेल पुलिस के द्वारा आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के क्रम में उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर चिकित्सा के लिए पीएमसीएच रेफर किया गया है, लेकिन, समाचार प्रेषण तक उसकी पहचान नहीं होने के कारण सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसे बेहतर चिकित्सा के लिए पटना ले जाएगा कौन ? ऐसी स्थिति में वह भी मौत को प्यारा हो गया.

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बता दें कि करीब छह दिन पूर्व ही जंक्शन के पूर्वी ढाला संख्या 47 पर ट्रेन से गिरकर 25 वर्षीय एक युवक की मौत उपचार के दौरान हुई थी. उसे भी बेहतर चिकित्सा के लिए पीएमसीएच रेफर किया गया था, लेकिन अज्ञात होने के कारण ना तो वह पीएमसीएच पहुंच पाया और ना ही उसे उचित उपचार मिल पाया था और वही उसकी मौत का कारण बना. जिसका शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद उसे 72 घंटे तक पोस्टमार्टम कक्ष में सुरक्षित रखा गया था, लेकिन पहचान नहीं होने के कारण डिस्पोज करवा दिया गया है. एक सप्ताह के अंदर ही दूसरी घटना घटित हुई है. उक्त दोनों ही शवों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है. ऐसी स्थिति में आप सुरक्षित यात्रा के लिए ट्रेन की गेट पर बैठना या खड़े होने से परहेज करें.

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