सारण की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु ‘ज्ञान भारतम’ मिशन के तहत पांडुलिपियों के संकलन का कार्य प्रारंभ

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CHHAPRA DESK –  सारण जिला प्रशासन द्वारा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘ज्ञान भारतम’ के अंतर्गत जिले की प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) को सहेजने और उन्हें डिजिटल रूप में संरक्षित करने का विशेष अभियान शुरू किया गया है. सारण जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस संबंध में जिले के समस्त नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं और प्रबुद्ध वर्ग से सहयोग की अपील की है. उन्होंने कहा कि “हमारी पांडुलिपियां हमारे गौरवशाली अतीत का हिस्सा हैं. समय के साथ इनके नष्ट होने का भय है. ‘ज्ञान भारतम’ के माध्यम से हम इन्हें आगामी पीढ़ियों के लिए डिजिटल रूप में सुरक्षित करना चाहते हैं. यदि आपके पास या आपके संज्ञान में ऐसी कोई भी प्राचीन पांडुलिपि (जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हो) है, तो उसे प्रशासन के साथ साझा करें.

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क्या है “ज्ञान भारतम मिशन” ?

ज्ञान भारतम मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत, जो प्राचीन पांडुलिपियों के रूप में बिखरी हुई है, उसे आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से सुरक्षित करना है. ये पांडुलिपियाँ ताड़ के पत्तों, भोजपत्र, कपड़े या पुराने कागजों पर लिखी हो सकती हैं, जिनमें हमारा प्राचीन ज्ञान, साहित्य, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और क्षेत्रीय इतिहास समाहित है. उन्होंने बताया कि इस मिशन में सहयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति, संगठन या निजी संग्रहकर्त्ता को जिला पदाधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा. जिला प्रशासन यह स्पष्ट करता है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मालिकों के पास ही रहेगा. प्रशासन केवल उनका वैज्ञानिक तरीके से डिजिटलीकरण करेगा ताकि उन्हें ‘राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी’ का हिस्सा बनाया जा सके.

इस क्रम में जिलाधिकारी ने आज चिरांद में स्व० ज्योतिष आचार्य की हस्तलिखत रचनाओं के संकलन का स्वयं अवलोकन किया तथा इसे संरक्षित रखने के लिये उनके परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया. वहीं उपविकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी ने स्व० भिखारी ठाकुर के पैतृक गांव कुतुबपुर दियारा में जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की तथा उनके द्वारा संरक्षित स्व० भिखारी ठाकुर की हस्तलिखित कुछ दस्तावेजों का अवलोकन किया. इस अवसर पर कला संस्कृति पदाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी सदर छपरा उपस्थित थे.

सारण में क्रियान्वयन की रूपरेखा :

जिला प्रशासन ने इन ऐतिहासिक दस्तावेजों की खोज के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है. मिशन की सफलता के लिए प्रशासन निम्नलिखित स्रोतों पर विशेष ध्यान दे रहा है. जिनमें :

* पुराने पुस्तकालय एवं संग्रहालय : जिले के प्राचीन शैक्षणिक संस्थानों और व्यक्तिगत संग्रहों की पहचान

* धार्मिक स्थल : हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर), आमी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों, मठों और मस्जिदों में उपलब्ध पांडुलिपियों का संकलन

 

* राजसी विरासत : हथुआ स्टेट और बेतिया राज जैसे ऐतिहासिक घरानों के अभिलेखागार

* संस्थान एवं समुदाय : जेपी विश्वविद्यालय की रिपॉजिटरी, लेखकों (हिंदी एवं भोजपुरी), धार्मिक नेताओं और ‘न्यास समिति’ के साथ मिलकर कार्य करना

* जन-भागीदारी : पंचायतों के मुखियाओं के साथ बैठक कर ग्रामीण क्षेत्रों में छिपे हुए प्राचीन दस्तावेजों की जानकारी जुटाना

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