आरएसएस के सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले चिरांद पुरातात्विक स्थल का किया दौरा

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CHHAPRA DESK –  आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले आज सारण जिला स्थित  चिरांद के प्रवास पर पहुंचे. जहांअपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान गंगा सरयू और सोन नदी के संगम तट स्थित चिरांद के पुरातात्विक स्थल एवं विभिन्न मठ मंदिरों का दौरा किया. उन्होंने पुरातात्विक स्थल के बारे में विस्तार से जानकारी ली. जिसके बाद वे चिरांद के गंगा तट पर स्थित प्राचीन अयोध्या मंदिर गए. अयोध्या मंदिर में लक्षण किलाधीस  आचार्य मैथिली रमन शरण महाराज ने उनका स्वागत किया. मंदिर में रामायण विशेषज्ञों ने उन्हें चिरांद के संस्कृत आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी. वहां विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि अयोध्या से चलकर अपने गुरु विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण गंगा सरयू और सोन के इस त्रिवेणी पर पहुंचे थे और रात्रि विश्राम किया था. रामायण के अनुसार यह स्थान भारत की ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है.

यहां शिव ने कई हजार वर्षों तक तपस्या कर जो ज्ञान प्रकट किया था और उसकी परंपरा चलाई थी, उसे वेदों में कल्प सूत्र कहा गया है. तपस्वी शिव यानी स्थानु ने ऋषि विभाण्डक के माध्यम से कल्प विद्या की परंपरा चलाई थी. उनके बाद उनके पुत्र ऋषि श्रृंगी ने उस परंपरा को आगे बढ़ाया. उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र ऋषि श्रृंगी की जन्मस्थली भी है. चिरांद प्रवास के दौरान उनके साथ जे पी विश्वविद्यालय छपरा के कुलपति प्रो प्रमेन्द कुमार वाजपेई, आईआईटी खड़गपुर के पूर्ववर्ती छात्र व एमएलसी सच्चिदानंद राय मौजूद थे. कुलपति श्री वाजपेई ने इस स्थल को लेकर शोध और अध्ययन, विकास परियोजना पर विचार रखे. वही एमएलसी श्री राय ने इसे विश्व स्तरीय केंद्र बनाने की योजना पर विचार रखा. वहीं पुरातत्वविद अनन्त आशुतोष द्विवेदी ने इसके विकास का रूपरेखा प्रस्तुत किया.


अयोध्या मंदिर के बाद वे चिरांद विकास परिषद के कार्यालय गए जहां परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ उन्होंने इस दुर्लभ पुरातात्विक स्थल के संरक्षण और विकास से संबंधित विविध पक्षों पर विस्तार से चर्चा की. चिरांद विकास परिषद के अध्यक्ष कृष्णकांत ओझा एवं सचिव श्रीराम तिवारी, कोषाध्यक्ष राशेश्वर सिंह ने परिषद की गतिविधियां के विषय मे विस्तार से जानकारी दी. प्रसिद्ध पुरातत्वविद आशुतोष अनन्त द्विवेदी एवं पुरातत्व निदेशालय के निदेशक विमल तिवारी ने यहां हुईं खुदाई के विषय में उन्हें पूरी जानकारी देते हुए कहा कि यह विश्व के विरले पुरातात्विक अवशेष है. बातचीत  के क्रम में श्री दत्ता ने बिहार और चिरांद के लोगों से आग्रह किया कि वह अपने धरोहर को संरक्षित एवं विकसित करने में अपना योगदान दें.

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