जाली दस्तावेज के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री मामले में समाहर्त्ता ने 28 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट समर्पित करने का दिया निर्देश

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CHHAPRA DESK –   सारण जिला में फर्जी कागजात के आधार पर जमीन की अनेकों बार रजिस्ट्री मामले के संज्ञान में आने के बाद समाहर्ता अमन समीर 28 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट समर्पित करने के लिए अपर समाहर्ता को निर्देश दिया है. बताया गया कि जिला निबंधन कार्यालय में पूर्व के वर्षों यथा-1960,1961, 1962 आदि के कुछ दस्तावेज कार्यालय में नहीं मिल रहे हैं एवं मिसिंग है. मिसिंग कुछ दस्तावेजों के रिकॉर्ड संख्या को आधार बनाकर फर्जी तरीके से जमीन की खरीद बिक्री कुछ लोगों द्वारा की जा रही है.
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अमन समीर ने अपर समाहर्त्ता मुकेश कुमार को इस मामले की गहनता से जांच सुनिश्चित करने का आदेश दिया है

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तथा 28 अप्रैल की संध्या तक स्पष्ट जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है. जांच के क्रम में जो भी कर्मी/पदाधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस मामले को लेकर जिलाधिकारी ने जिला अवर निबंधक, सारण को पूर्व के वर्षों के सभी मिसिंग दस्तावेजों की सूची 1 महीने के अंदर तैयार करने को कहा है. संपूर्ण सूची तैयार कर इसे छपरा नगर निगम एवं सभी अंचलाधिकारियों को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि

भविष्य में कभी भी संदर्भित दस्तावेजों का संबंधित कार्यालय में उपयोग करने वाले लोगों पर कार्यालय प्रधान द्वारा विशेष निगरानी रखी जा सके तथा एक ही दस्तावेज का कई बार उपयोग करने वालों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जा सके. डीएम ने बताया कि छपरा निबंधन कार्यालय मे संधारित अभिलेखों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए संवेदनशीलता और दृढ़ कदम उठाए गए हैं. यहां संधारित विभिन्न कार्यालयों से संबंधित जिल्दों का सत्यापन कर इनकी सूचि बनाई गई है तथा बचे हुए जिल्दों का सत्यापन किया जा रहा है.

यहां पर रखे सीवान और गोपालगंज से संबंधित जिल्द संबंधित कार्यालयों को भेज दिया गया है तथा जो जिल्द भेजने को शेष हैं उनकी सूची बनाकर भेजने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. सभी अभिलेख सुरक्षित रहें और किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो तथा अभिलेखों की सत्यापित प्रति आसानी से उपलब्ध हो जाए, इसको ध्यान में रखते हुए इसका डिजिटाइजेशन कराया जा रहा है. सभी अवर निबंधन कार्यालयों में वर्ष 1990 से अभी तक तथा छपरा अभिलेखागार के 1968 तक के लगभग सभी जिल्द का डिजिटाइजेशन कराया जा चुका है.

पूर्व में फर्जी दस्तावेज की सूचना या शिकायत मिलने इसकी जांच वर्तमान पदाधिकारी द्वारा की गई है. साथ ही अभिलेखों की नियमित जांच भी की गई है. जालसाजी या छेड़छाड़ के मामले पकड़े जाने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर दोषियों पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई है. दिसंबर 2024 में वर्ष 1983, 1964, 1934 के कुछ दस्तावेज जिनके साथ पूर्व में ही छेड़छाड़ की गई थी में दोषी व्यक्तियों तथा तत्कालीन अभिलेखपाल के विरुद्ध निबंधन कार्यालय द्वारा नगर थाना में प्राथमिकी दर्जा करायी गई थी.

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