डीएम ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ; पदाधिकारियों को दिया निर्देश

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CHHAPRA DESK –  सारण जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा हेतु बैठक आयोजित की गई. समीक्षा के दौरान जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिले के आम लोगों को सुलभ, पारदर्शी और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत वैसे पॉकेट को चिन्हित करने को कहा गया जहाँ से मामले रिपोर्ट नहीं हो रहे हैं. सभी MOIC को अधीनस्थ आशा के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों का प्रभावी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने को कहा गया.  जिले में पूर्ण टीकाकरण का मई माह का औसत 96 प्रतिशत है. हालांकि, जिले के 2 प्रखंडों — लहलादपुर एवं परसा में टीकाकरण की उपलब्धि 90 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई है. इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला पदाधिकारी ने इन सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारियों (MOICs) से एक-एक कर कम उपलब्धि का कारण पूछते हुए प्रदर्शन सुधारने का स्पष्ट निदेश दिया.

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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की समीक्षा की गई. 01 अप्रैल से 15 जून की अवधि में 174 सर्जिकल मामलों की पहचान कर उन्हें संदर्भित (Refer) किया गया, जिनमें कंजेनिटल हार्ट डिजीज (CHD) के 52 मामले शामिल हैं. जिलाधिकारी ने इन सभी मामलों का निरंतर फॉलो अप सुनिश्चित करने का निदेश दिया. ANC कवरेज में मई माह में लहलादपुर एवं परसा में आच्छादन असंतोषप्रद पाया गया. सभी MOIC को इसमें आवश्यक सुधार लाने का निदेश दिया गया. आइसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय से ANC कवरेज में सुधार लाने का निदेश दिया गया. आयरन फोलिक एसिड एवं कैल्शियम कवरेज में अपेक्षित सुधार लाने का निदेश दिया गया। परसा एवं लहलादपुर की स्थिति अत्यंत असंतोषप्रद पाई गई. दोनों MOIC को स्पष्ट रूप से सुधार लाने का निदेश दिया गया. संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) बढ़ाने और आशा कार्यकर्ताओं की मैपिंग का निर्देश: ​समीक्षा में यह बात सामने आई कि जिले में महिलाओं के प्रसव पूर्व पंजीकरण के अनुपात में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों (Govt. Facilities) में मई माह में केवल 3444 (35 प्रतिशत) संस्थागत प्रसव ही दर्ज किए गए.

जिला पदाधिकारी ने इस बड़े अंतर पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि जो भी प्रसव निजी अस्पतालों या घरों में हुए हैं, उनकी ट्रैकिंग की जाए. इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को चिन्हित करते हुए उनकी जवाबदेही तय करने का कड़ा निर्देश दिया गया. मातृ मृत्यु के मामलों का ऑडिट सुनिश्चित करें, इसका कारण का पता करें तथा भविष्य के लिये इसमें आवश्यक सुधार लाने की कार्रवाई करें.  NRC (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर)में अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को लाने के लिये सभी सीडीपीओ को प्रभावी कार्रवाई का निदेश किया गया. जनवरी से अभी तक 132 बच्चों को NRC में भेजा गया है. इसमें बढ़ोतरी लाने का निदेश दिया गया. बैठक में उप विकास आयुक्त (DDC), सिविल सर्जन (CS), सभी जिला स्तरीय चिकित्सा पदाधिकारी, सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी (MOICs), प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक (BHMs), प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक (BCMs), सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी एवं सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे.

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