बैंक मैनेजर की मिली भगत से होता था साइबर फ्रॉड ; ₹2 करोड़ से अधिक के साइबर फ्रॉड में मैनेजर समेत छह लोग गिरफ्तार

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PATNA DESK –     डिजिटल दुनिया ने भले ही हमारे लिए कई चीजें आसान कर दी हों लेकिन इसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. बढ़ते साइबर अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे स्पेशल अभियान के तहत कटिहार साइबर थाना पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. म्यूल अकाउंट यानी संदिग्ध बैंक खातों के जरिए हो रहे करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन का खुलासा करते हुए पुलिस ने एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में एक बैंक मैनेजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. कटिहार साइबर डीएसपी रामकृष्ण कुमार ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि बिहार पुलिस मुख्यालय के अधीन इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए ऑपरेशन प्रहार 2.0 चलाया जा रहा है. इसी अभियान के दौरान साइबर थाना कटिहार ने म्यूल अकाउंट के जरिए किए जा रहे अवैध ट्रांजैक्शन के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है.

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सीए के खाते से 50 लाख से ज्यादा का लेनदेन

साइबर डीएसपी के मुताबिक, हाल ही में CA निशांत अग्रवाल और रवि शंकर रवि को गिरफ्तार किया गया है. दोनों आरोपियों ने अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों को मुहैया कराया था, जिनके जरिए करीब 50 लाख 69 हजार रुपये का अवैध लेनदेन किया गया. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मामले से बचने के लिए बैंक चेकबुक, मोबाइल फोन और कंपनी की मुहर खोने की झूठी सूचना थाने में दर्ज कराई थी.

ICICI बैंक मैनेजर भी गिरफ्तार

पुलिस ने दूसरे मामले में खाता धारक कैलाश प्रसाद साह, रिंकू कुमार, राजेश कुमार मिश्रा और ICICI बैंक के ब्रांच मैनेजर कौशल झा को गिरफ्तार किया है. साइबर डीएसपी के अनुसार, सभी आरोपियों ने मिलकर साइबर अपराधियों के साथ सांठगांठ कर खातों के जरिए करीब 1 करोड़ 71 लाख रुपये का अवैध ट्रांजैक्शन किया है. इस दौरान बॉडी लेंथ ट्रांसफर के जरिए बड़ी रकम की निकासी की गई.

26 संदिग्ध खातों की पहचान, जांच जारी

पुलिस के अनुसार अब तक कुल 26 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है, जिनकी गहन जांच की जा रही है. साइबर थाना पुलिस एक-एक कर सभी खातों का सत्यापन कर रही है और विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है. साइबर डीएसपी ने बताया कि पहले मामले में आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में कुल 11 केस दर्ज हैं,

जबकि दूसरे मामले में आरोपियों के विरुद्ध सात अलग-अलग राज्यों में मुकदमे दर्ज पाए गए हैं. हालांकि अभी तक किसी भी मामले में नकद राशि की बरामदगी नहीं हो सकी है. जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग कमीशन के लालच में अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए दे देते हैं. डिजिटल ट्रेस से बचने के लिए बाद में चेकबुक, मुहर और मोबाइल खोने की झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके.

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