BNS कानून के तहत देश का पहला फैसला ; सारण के चर्चित तिहरे हत्याकांड में महज 48 दिन में दोनों हत्याभियुक्तों को कोर्ट ने सुनाई 25 हजार के आर्थिक दंड के साथ आजीवन कारावास की सजा

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CHHAPRA DESK – BNS कानून के तहत देश का पहला फैसला सारण जिले में हुआ है. 48 दिन में हुए इस फैसले में तिहरे हत्याकांड के दोनों अभियुक्तों को ₹25000 के आर्थिक दंड के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. जिले के इस चर्चित तिहरे हत्या कांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग ने रसूलपुर थाना कांड संख्या 133/24 सत्रवाद संख्या 693/ 24 में रसूलपुर थाना के रसूलपुर निवासी रोशन उर्फ सुधांशु कुमार तथा अंकित कुमार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(i) के अन्तर्गत आजीवन कारावास तथा 25 हजार अर्थ दण्ड नहीं देने पर अतिरिक्त छह माह की सजा तथा 109(i)में 6 साल कठोर कारावास एवं 10 हजार अर्थ दण्ड नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा तथा 329(4)के अंतर्गत 6 माह की सजा तथा 5 हजार रुपए अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त दो माह की सजा सुनाई है.

बताते चले कि रसूलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत धनाडीह निवासी शोभा देवी पति स्वर्गीय तारकेश्वर सिंह ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकमा में पुलिस पदाधिकारी के सामने 17 जुलाई 2024 को जख्मी हालत में अपना बयान दर्ज कराई थी. जिसमें उसने बतलाया था कि 16 जुलाई 2024 की मध्य रात्रि 2:00 बजे वह अपने दोनों बेटी चांदनी कुमारी उम्र 17 वर्ष आभा कुमारी उम्र 15 वर्ष और अपने पति तारकेश्वर सिंह के साथ छत पर सोई थी. तभी बेटी चांदनी कुमारी ने देखा कि पास गांव का रोशन उर्फ सुधांशु कुमार पीछे से छत पर चढ़ रहा है.

चांदनी ने मना किया तभी अंकित कुमार और रोशन उर्फ सुधांशु दोनों अपने हाथ में लिए चाकू से उसकी बेटी चांदनी कुमारी के ऊपर वार करने लगे उसको बचाने के लिए आभा कुमारी पिता तारकेश्वर सिंह आए और सुचिका भी गई तो उनको भी वे लोग मारने लगे हल्ला सुन के अगल-बगल के लोग आए. घटनास्थल पर ही दोनों लड़की चांदनी कुमारी और आभा कुमारी तथा उनके पिता तारकेश्वर सिंह की मृत्यु हो गई. गांव के लोगों ने सुचिका को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया, जहां उसका इलाज हुआ. घटना का कारण प्रेम प्रसंग बताया गया है. अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक सुरेंद्रनाथ सिंह एवं उनके सहयोगी सुभाष चंद्र दास ने सूचिका और डॉक्टर अनुसंधानकर्ता सहित कुल 12 गवाहों की गवाही न्यायालय में कराई. बचाव पक्ष की ओर से वीरेश कुमार चौबे और अनिल कुमार सिंह ने अपना पक्ष न्यायालय में रखा.

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