माह-ए-रमज़ान में गुनाह माफ होते हैं : कारी अनस

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GORAKHPUR, UP – मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर के शिक्षक कारी मोहम्मद अनस रज़वी ने बताया कि रहमत का अशरा चल रहा है लिहाजा हमें अपने गुनाहों की खूब माफी मांगनी चाहिए. माह-ए-रमजान में जो भी अपने मां-बाप के साथ एहसान करेगा, अल्लाह उसकी तरफ निगाहे रहमत करेगा. जो कोई माह-ए-रमजान में किसी मुसलमान की हाजत यानी जरुरत पूरी करता है अल्लाह उसकी दस लाख हाज़त पूरी फरमाता है.

जो इस माहे मुबारक में किसी बाल बच्चेदार फकीर को खैरात देता है अल्लाह उसके लिए दस लाख नेकियां लिखता है और उसके दस लाख गुनाह माफ फरमा देता है और दस लाख दर्जात बुलंद फरमाता है.गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के मौलाना मोहम्मद अहमद निज़ामी ने कहा कि रमज़ान हमदर्दी व गम ख्वारी का महीना है. यह ऐसा महीना है जिसमें मोमिन का रिज़्क बढ़ा दिया जाता है. रमज़ान के महीने में की गई इबादत व नेकी का सवाब कई गुना हो जाता है.

रोज़े की हालत में उल्टी आने से रोज़ा नहीं टूटेगा : उलमा किराम

तंजीम उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्पलाइन नंबरों पर सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा. लोगों ने नमाज़, रोज़ा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए. उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.

1. सवाल : क्या रोज़े की हालत में उल्टी आने से रोज़ा टूट जाता है? (अब्दुल्लाह, बड़े काजीपुर)
जवाब : नहीं, रोज़े की हालत में खुद ब खुद उल्टी आने से रोज़ा नहीं टूटता, अगर्चे मुंह भर हो या उससे भी ज्यादा. (मौलाना मोहम्मद अहमद)
2. सवाल : खरीदी हुई जमीन पर जकात है या नहीं? (गोल्डी, बड़गो)
जवाब : अगर रिहाइशी मकान के लिए खरीदा है तो उस पर जकात नहीं. अगर तिजारत (बिजनेस) की नियत से खरीदा है तो उस पर जकात फ़र्ज़ है (मुफ्ती अख़्तर)

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