प्रैक्टिस करने वाले वकील को उसी कोर्ट ने सुनाई 30 वर्ष की सजा ; आखिर क्यों ? पढ़ें पूरी खबर…

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VAISHALI DESK –  वह वकील उसी कोर्ट में प्रैक्टिस करता था और उसी कोर्ट ने उसे 30 वर्ष की सजा सुनाई है. जोकि बिहार में पहली बार हुआ है.हाजीपुर व्यवहार न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकील को कोर्ट ने 30 साल की सजा सुनाई है. दोषी वकील जिस कोर्ट में दूसरों के केस लड़ता था, उसी कोर्ट ने उसे सजा सुनाई है. एडवोकेट मोहम्मद आलम पर 30 हजार का अर्थदंड भी लगाया है.

वकील को कोर्ट ने 11 साल के बच्चे के साथ अननेचुरल सेक्स का दोषी पाया है. विशेष न्यायाधीश पॉक्सो सह एडीजे 6 जीवन लाल कीकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है. दोषी मोहम्मद आलम को आईपीसी की धारा 377 पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत सजा सुनाई गई है.वैशाली के साथ-साथ बिहार के लिए यह पहला जजमेंट है, जब एक वकील को 30 साल की सजा सुनाई गई है. पॉक्सो कोर्ट के स्पेशल पीपी मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि मामला 2021 का है. एक 11 साल का नाबालिग लड़का काम की तलाश में महुआ समस्तीपुर रोड पर अपने दोस्त के साथ पान की दुकान पर बैठा हुआ था.

बाइक से रंजीत पटेल और मोहम्मद आलम वहां पहुंचे और उस लड़के से उसके बारे में पूछा. बच्चे ने बताया कि घर का बहुत गरीब है. काम की तलाश में भटक रहा है. यह सुनकर रंजीत पटेल और मोहम्मद आलम उससे बोलते हैं कि हमारे साथ चलो. हम यहां खाना-पीना देंगे. बदले में घर की साफ-सफाई का काम करना पड़ेगा.

ये मामला 20 फरवरी 2021 की शाम 6:30 बजे का है. नाबालिग बच्चा मोहम्मद आलम के साथ उसके घर आ गया. रंजीत पटेल और मोहम्मद आलम ने रात में शराब पी. जिसके बाद उस बच्चे के साथ उसने अननेचुरल सेक्स किया. बच्चा सुबह में जब तकलीफ से कराह रहा था, तो उसको पान की गुमटी पर छोड़ दिया. बच्चे ने अपनी चाची को आपबीती बताई. बच्चे को महुआ अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया. वहां से उसको हाजीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. महुआ स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर ने पाया कि उसके एनल से खून निकल रहा है जो कि अप्राकृतिक यौनाचार की पुष्टि करता है.

पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश जीवन लाल की ओर से दोषी करार दिया गया था. मोहम्मद आलम का ट्रायल चल रहा थ. सजा के बिंदुओं पर सुनवाई हुई. इसके बाद मोहम्मद आलम को 30 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है. कोर्ट का फैसला 2 साल बाद आया है. कोर्ट ने दोषी पर 30 हजार का अर्थदंड लगाया है. जिसमें 377 आईपीसी के तहत 10 साल का सश्रम कारावास और 10 हजार का अर्थदंड लगाया है.

राशि नहीं देने पर 6 महीने का अतिरिक्त कारावास और पॉक्सो की धारा 6 के तहत 20 साल का सश्रम कारावास और 20 हजार का अर्थदंड लगाया गया है. राशि नहीं देने पर 1 साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया है. दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी. इस पूरे मामले में चार अभियुक्त हैं, जिसमें 1 मोहम्मद आलम का ट्रायल पूरा हो गया. मोहम्मद आलम पेशे से व्यवहार न्यायालय हाजीपुर के अधिवक्ता है.

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