नौसिखिए नहीं है अतीक और अशरफ के हत्यारे ; क्या है सच ? आखिर किसने किया पर्दे के पीछे से खेल ?

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CHHAPRA DESK – यूपी के तीन कोने हमीरपुर, कासगंज और बांदा से प्रयागराज पहुंचे सनी, अरुण और लवलेश नौसिखिए नहीं है इतना तो तय है. अब तक उनके ऊपर दर्जनों केस है लेकिन क्राइम की दुनिया में कोई चेहरा नहीं था. ना ही कोई संगठित गिरोह था. तीनों के पास तुर्की का ऑटोमेटिक पिस्टल का होना भी जांच का विषय है. क्योंकि, यह पिस्टल इंडिया में प्रतिबंधित तो है ही लेकिन एक पिस्टल की कीमत से से ₹ 6 – 7 लाख बताई जा रही है.

तीनों के द्वारा एक बड़े गैंगस्टर की पुलिस कस्टडी में हत्या किए जाने का फिलहाल कोई स्पष्ट कारण तो नहीं दिख रहा है लेकिन ऐसी चर्चा है कि तीनों क्राइम की दुनिया में बुलंदियों को पाना चाहते थे. लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि तीनो एक साथ कैसे मिले और पूरी घटना की प्लानिंग कैसे हुई कि इसकी भनक पुलिस को नहीं लग सकी ?

ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि इस घटना की फुलप्रूफ प्लानिंग पर्दे के पीछे की गई है और तीनों को मोहरा बनाते हुए इस घटना को अंजाम दिलवाया गया है. क्योंकि उनका डर तो सर्वाधिक राजनीतिक पार्टियों को ही था. लेकिन वह कौन है यह तो अभी राज ही रहेगा. अतीक अशरफ हत्याकांड में शामिल सनी हमीरपुर, अरुण उर्फ कालिया कासगंज और लवलेश तिवारी बांदा जिले का रहने वाला हैं.


सनी सिंह, हमीरपुर :

सनी सिंह हमीरपुर जिले के कुरारा कस्बे का रहने वाला है. वो कुरारा पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसका हिस्ट्रीशीट नंबर 281A है. उसके खिलाफ करीब 15 केस दर्ज हैं. उसके भाई पिंटू ने बताया कि वो बीते 10 साल से अपने घर नहीं आया है. सनी के पिता जगत सिंह और मां की मौत हो चुकी है. सनी के तीन भाई थे, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है और दूसरा भाई पिंटू घर पर रहता है और चाय की दुकान चलाता है. भाई ने बताया कि ये ऐसे ही घूमता-फिरता रहता था और फालतू के काम करता रहता था. हम उससे अलग रहते हैं, वो बचपन में ही घर से भाग गया था.

अरुण सिंह, कासगंज :

अतीक-अशरफ हत्याकांड में कासगंज का अरुण उर्फ कालिया भी शामिल था. वो सोरों थाना क्षेत्र के बघेला पुख्ता का रहने वाला है. अरुण के पिता का नाम हीरालाल बताया जा रहा है. वो छह साल से बाहर रह रहा था. उसके माता-पिता की मौत करीब 15 पहले हो चुकी थी. अरुण ने जीआरपी थाने में तैनात पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी, जिसके बाद से ही वो फरार है. अरुण के दो छोटे भाई भी हैं, जिनके नाम धर्मेंद्र और आकाश हैं, जोकि फरीदाबाद में रहकर कबाड़ी का काम करते हैं.

 

लवलेश तिवारी, बांदा

बांदा में लवलेश तिवारी के घर का पता चल गया है. वो शहर कोतवाली के क्योतरा इलाके का रहने वाला है. उसके पिता ने कहा कि हमसे उसका कोई मतलब नहीं था. वह कभी-कभी ही घर आता-जाता था. 5-6 दिन पहले ही बांदा आया था.

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