‘’ दिव्‍यांगजन अधिकार अधिनियम 2016’’ में वर्णित सुसंगत धाराओ को धरातल पर उतारने के लिए बिहार के दिव्‍यांगजनो ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का किया आगाज

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CHHAPRA DESK – ’दिव्‍यांगजन अधिकार अधिनियम 2016’’ में वर्णित सुसंगत धाराओ को बिहार सरकार द्वारा धरातल पर लागु करवाने हेतु दिव्यांगजनों ने पटना के गांधी मैदान में अनिश्चितकालीन सत्‍याग्रह का आयोजन किया. पटना जिला PWD (पर्सन विथ डिसेबिलिटी) संघ के नेतृत्‍व में बिहार PWD संघ एवं ऑलइंडिया PWD संघ के सहयोग से आयोजित इस आंदोलन में पूरे बिहार के 38 जिलों से 10,000 से अधिक दिव्‍यांगजन अनिश्चितकालीन सत्‍याग्रह महा आंदोलन पर बैठे हैं.

बिहार एसोसिएशन ऑफ द्वारा इस सत्याग्रह में सरकार से मांग की जा रही है कि दिव्यांग आयोग का गठन हो, दिव्यांगजन को रोजगार से जोड़ा जाए तथा दिव्यांगता पेंशन 3000 किया जाए. दिव्यांगजन के राशन कार्ड को अंत्योदय से जोड़ा जाए. राज्य नि:शक्तता आयुक्त कार्यालय में पद खाली है, दिव्यांगजन के समस्या दिल और मन से सुनने समझने वाले जानकार व्यक्ति को कमिश्नर पद पर बहाल किया जाए. मौके पर उपस्थित सभी अतिथियों एवं सदस्‍यों ने बताया कि हमारी मांगे दिव्‍यांगजनों के लिए है.

उन्‍हे समाज के मुख्‍य धारा से जोड़ने, पुनर्वास एवं सम्‍मानित जीवन यापन के लिए हैं. हमारी मांगे दिव्‍यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के सुसंगत धाराओं को सरकार द्वारा जमीनी स्‍तर पर लागू करवाने के लिए है. जब तक हमारी 46 सूत्रीय मांगो को सरकार द्वारा मानी नही जायेगी तबतक पूरे बिहार के 51 लाख दिव्‍यांगजनों द्वारा अनिश्चितकालीन सत्‍याग्रह महा आंदोलन जारी रहेगा. आज के अनिश्चितकालीन सत्‍याग्रह महा आंदोलन में प्रवीण कुमार मिश्रा (अध्‍यक्ष, ऑल इण्डिया पीडब्‍लूडी संघ) ह्रदय यादव (कार्यकारी अध्‍यक्ष, ऑल इण्डिया पीडब्‍लूडी संघ) संजीव कुमार (अध्‍यक्ष, पटनाजिला पीडब्‍लूडी संघ), सुगन्‍ध नारायण प्रसाद (सचिव, बिहार एसोसिएशन ऑफ पीडब्‍लूडी), मोती लाल (कोषाध्‍यक्ष, बिहार पीडब्‍लूडी संघ) लालु तुराहा (मिडिया प्रभारी, बिहार पीडब्‍लूडी संघ), शबनम खातून, पोशान सिंह, अगस्त कुमार उपाध्याय उर्फ छोटू बाबा बक्सर जिलाध्यक्ष एवं महिला प्रभारी अंजू कुमारी सहित हजारों दिव्यांगजन शामिल हुए.

 

विदित हो कि पिछले बीस महीनों से दिव्यांगजनो के लिए एक भी कोर्ट नहीं लगा है और राज्य आयुक्त कार्यालय से दिव्यांगजनों के हित के लिए एक भी पत्र जारी नहीं हुआ. दिव्यांगों के समस्याओं एवं परिवाद पत्रों का अंबार लगा हुआ है. उस पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है.

 

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