सारण जिले की कब हुई स्थापना ? राज्य सरकार के बजट में नहीं है इसका कोई साक्ष्य

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CHHAPRA DESK –  सारण की स्थापना कब हुई? इसकी जानकारी किसी को नहीं है. और तो और राज्य सरकार के बजट में भी सारण की स्थापना का कोई जिक्र नहीं है. जी हां !राज्य में कुछ जिले ऐसे हैं जिनकी स्थापना कब हुई, उसकी जानकारी ना तो राज्य सरकार के गजट में है, और ना ही ऐतिहासिक किताबों के पन्नों में दर्ज है. जिसमें सारण भी शामिल है. जिसको लेकर सारण जिलाधिकारी अमन समीर जिला स्थापना दिवस आयोजित करने के लिए स्थापना दिवस की तिथि का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं. सारण में जब से उन्होंने योगदान दिया था तब से इसकी तिथि को पता लगाने में जुटे रहे, लेकिन तथ्य के साथ तिथि सामने नहीं आ पाई है.

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तिथि निर्धारण के लिए उन्होंने अब एक 10 सदस्यीय समिति बनायी है. इसी समिति की बैठक गुरुवार को उन्होंने अपने कार्यालय कक्ष में की. उन्होंने सभी सदस्यों से सारण जिले के स्थापना तिथि को जानने का प्रयास किया. लेकिन तथ्य परक कोई तिथि सामने नहीं आ पाई है. इसके बाद उन्होंने उप विकास आयुक्त यतेंद्र कुमार पाल को इस संदर्भ में जानकारी का पता लगाने का दायित्व दिया है. स्थापना दिवस चयन के लिए 10 लोगों की समिति बनाई गई है. इसमें उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता सारण, नगर आयुक्त सारण, बंदोबस्त पदाधिकारी सारण, प्रभारी पदाधिकारी सामान्य शाखा, स्थापना उपसमाहर्ता, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, प्रोफेसर एचके वर्मा, संजय कुमार, प्रोफेसर सुधीर कुमार सिंह इतिहास विभाग अध्यक्ष जयप्रकाश विश्वविद्यालय शामिल है.

स्थापना तिथि नहीं मिलने पर ऐतिहासिक घटनाओं की तिथि से होगा निर्धारण

जिलाधिकारी ने बैठक के दौरान कहा कि अभी विभिन्न स्रोतों से सारण जिले की स्थापना की तिथि को खोजी जा रही है. यदि नहीं मिलती है तो अंत में सारण में जो ऐतिहासिक घटनाएं हुई है उन घटनाओं की तिथि में से किसी एक तिथि का चयन किया जाएगा और उसी दिवस पर स्थापना दिवस समारोह मनाया जाएगा. इसके लिए सर्वसम्मति से राय ली जाएगी. सारण के स्थापना दिवस की तिथि को पता लगाने के लिए सामान्य शाखा के प्रभारी पदाधिकारी पटना जा सकते हैं. पटना में स्थित विभिन्न पुस्तकालय, आर्काइव्स और अन्य स्रोतों से इसकी जानकारी लेंगे. जिलाधिकारी ने अधिकारियों को अनुमति प्रदान करते हुए कहा कि सारण के इतिहास से जुड़ी हुई बात है इसलिए इसका पता लगाना जरूरी है और इसके स्थापना दिवस समारोह को भी आयोजित करना गौरव का पल होगा.

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