पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का दिल्‍ली AIIMS में निधन ; सांस लेने की तकलीफ के बाद कराया गया था भर्ती

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CHHAPRA DESK –  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और देश को आर्थिक संकट से उबारने वाले खेवनहार डॉक्‍टर मनमोहन सिंह का आज निधन हो गया है. सांस लेने में कठिनाई की शिकायत के बाद उन्‍हें दिल्‍ली AIIMS लाया गया था. जहां उन्‍हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करावाया गया था. मल्‍टीपल डिपार्टमेंट की टीम उनके स्‍वास्‍थ्‍य की निगरानी रख रही थी, लेकिन उन्‍हें बचाया नहीं जा सका.बता दें कि मनमोहन सिंह देश के 13वें प्रधानमंत्री थे और एक विशेषज्ञ अर्थशास्त्री थे. लोकसभा 2009 में मिली जीत के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जिनको 5 वर्षों का कार्यकाल सफलता पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला था. उनका जन्म ब्रिटिश भारत के पंजाब में 26 सितंबर 1932 को हुआ था. 92 वर्ष की आयु में आज उन्होंने दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली है.

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भारतीय राजनीति और आर्थिक सुधारों में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा. 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की राह पर ले जाने वाले डॉ मनमोहन सिंह का योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता. उन्होंने दो कार्यकाल (2004-2014) तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की और देश के विकास में अहम भूमिका निभाई.
1971 में डॉ सिंह भारत सरकार से जुड़े और वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार बने. 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय का मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया. इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें वित्त मंत्रालय के सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं.

1991 से 1996 तक डॉ सिंह भारत के वित्त मंत्री रहे. इस दौरान उन्होंने आर्थिक सुधारों की एक व्यापक नीति लागू की, जिसे विश्वभर में सराहा गया. इन सुधारों ने भारत को आर्थिक संकट से उबारकर एक नई दिशा दी. डॉ मनमोहन सिंह 1991 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने. उन्होंने असम का प्रतिनिधित्व पांच बार किया और 2019 में राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बने. 1998 से 2004 तक, जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में थी, डॉ सिंह राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे. उन्होंने 1999 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली.

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