विधि मंडल के अधिवक्ता छपरा व्यवहार न्यायालय के सभी न्यायालय कार्यों का करेंगे अनिश्चितकालीन बहिष्कार

0 minutes, 2 seconds Read

CHHAPRA DESK –   छपरा व्यवहार न्यायालय में प्रातः 11:00 बजे मुख्य गेट पर तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा बनाए गए पुलिस बैरियर के आगे अधिवक्ताओं के मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों को रोकने के प्रधान जिला जज के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता आक्रोशित हो गए. जिसके बाद आपातकालीन बैठक कर जिला जज के इस तुगलकी फरमान के विरोध में संपूर्ण न्यायालय का बहिष्कार करने का फैसला करते हुए व्यवहार न्यायालय परिसर में घूमे और सभी अधिवक्ताओं को एकत्रित कर प्रधान जिला जज से मुलाकात कर इस आदेश को वापस करने का अपील किया. वहीं विधि मंडल के अध्यक्ष गंगोत्री प्रसाद की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं की आपात आमसभा की बैठक विधि मंडल के मुख्य कक्ष में हुई. महामंत्री अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया की प्रधान जिला जज के आदेश संख्या 385G /25 में आंशिक संशोधन आदेश संख्या 16G/26 दिनांक 2/2/26 के विरोध में हुई.

अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक कार्य से बहिष्कार करने के संबंध में चर्चा की गई. आम सभा द्वारा उपस्थित सदस्यों ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग के आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण एवं अधिवक्ताओं के लिए तुगलकी फरमान बताया. उपस्थित सदस्यों ने भी अपने-अपने विचार रखें. सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तुगलकी फरमान आदेश जब तक उनके द्वारा वापस नहीं लिया जाता है तब तक विधि मंडल के तमाम सदस्य व्यवहार न्यायालय छपरा के सभी न्यायालय के न्याय कार्य से अपने को अलग रखेंगे.

वरीय अधिवक्ता त्रियोगी नाथ सिन्हा ने कहा कि इतने दिनों के प्रैक्टिस में मैंने आज तक इस प्रकार का आदेश नहीं देखा था. व्यवहार न्यायालय में पहले बार आता है उसके बेंच और दोनों का एक गहरा संबंध होता है. महामंत्री अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रधान जिला जज से पूर्व में अधिवक्ताओं की पंद्रह सदस्यीय सदस्य कमेटी मिली थी और हम लोगों ने इस आदेश का विरोध किया था. अधिवक्ताओं को न्यायालय आने और जाने का कोई समय नहीं होता है.

छपरा व्यवहार न्यायालय से अधिवक्ता मढ़ौरा और सोनपुर न्यायालय में भी प्रेक्टिस करने जाते हैं. छपरा व्यवहार न्यायालय में वैसे भी बुजुर्ग वरीय अधिवक्ता है जो अपने निजी गाड़ी से ही न्यायालय परिसर में एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में जाते हैं. इस प्रकार के आदेश का सभी अधिवक्ता द्वारा विरोध किया गया. अधिवक्ताओं की आमसभा में सैकड़ो की संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे.

 

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *