स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की DM ने की समीक्षा

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CHHAPRA DESK- सारण जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने आज स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्रियान्वित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं की समीक्षा की. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आरबीएसके की 30 टीम द्वारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है. स्वास्थ्य परीक्षण के क्रम में अनीमिया के साथ साथ न्यूरल ट्यूब दोष, डाउन सिंड्रोम, होठ एवं तालु का फांक / कटा हुआ , विकृत पैर रचना, कुल्हा का कम विकास, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदय रोग जैसी बीमारियों की पहचान कर संबंधित बच्चों के समुचित स्तर पर ईलाज के लिये आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. चिकित्सीय जांच के क्रम में अनीमिया एवं विभिन्न प्रकार की जन्मजात बीमारियों आदि की पहचान होने के उपरांत संबंधित बच्चे/बच्ची के ईलाज के लिये संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र / आरबीएसके के माध्यम से नियमित फॉलो अप सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.

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अप्रैल माह में आईजीआईसी पटना में चिकित्सीय जाँच के उपरांत सारण जिला के हृदय रोग से ग्रसित 50 बच्चों को सर्जरी के लिये चिन्हित किया गया है. इन बच्चों की सर्जरी मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के अंतर्गत श्रीसत्य साईं अस्पताल, अहमदाबाद में कराई जायेगी. जिला में आरबीएसके के प्रति टीम द्वारा प्रतिदिन औसतन 88 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है. प्रति टीम प्रतिदिन के जिला औसत से कम उपलब्धि नगरा, अमनौर, एकमा, गड़खा एवं सोनपुर में दर्ज की गई है. इन सभी प्रखंड की टीम को अपेक्षित सुधार लाने को कहा गया. प्रत्येक बुधवार एवं गुरुवार को प्रखंड के वरीय प्रभारी पदाधिकारियों द्वारा फील्ड इंस्पेक्शन में आरबीएसके टीम के कार्य का भी स्थल पर निरीक्षण किया जायेगा.

पूर्व में ईलाज के लिये चिन्हित वैसे बच्चे जिनका ईलाज/पूरा ईलाज नहीं हुआ है, को चिन्हित कर उचित प्रक्रिया के तहत उचित जगह पर ईलाज के लिए भेजने का निदेश दिया गया. NQAS सर्टिफिकेशन के लिये जिला के सभी शेष अस्पतालों को आवेदन करने को कहा गया. जिला के सभी अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित कमियों को चिन्हित किया गया है. इनमें से अस्पताल के स्तर से दूर की जाने वाली कमियों को आवश्यक कार्रवाई कर अविलंब दूर करने को कहा गया. अन्य बड़ी कमियों को दूर करने के लिए बी०एम०एस०आई० सी०एल० को प्रस्ताव भेजा जायेगा. गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कर उचित इलाज किया जाता है.

जनवरी माह से अबतक NRC में 74 SAM बच्चे का एडमिशन कर इलाज किया गया है. मढ़ौरा, परसा एवं रिविलगंज से इस अवधि में किसी भी SAM बच्चे को NRC में एडमिट नहीं किया गया है, जिलाधिकारी ने सभी संबंधित बीसीएम को अधिक से अधिक SAM बच्चे को चिन्हित कर उनके अभिभावकों की काउंसलिंग कर बच्चों को NRC में एडमिट कराने का स्पष्ट निर्देश दिया. जिला के अस्पतालों में दवाओं की औसत उपलब्धता 92 प्रतिशत है. इसे 95 प्रतिशत तक ले जाने का निर्देश दिया गया. इसके लिये सभी बीएचएम को ससमय इंडेंट सुनिश्चित करने को कहा गया. जिला में ऑनलाइन इंजुरी रिपोर्ट 99 प्रतिशत मामलों में सुनिश्चित किया जा रहा है. इसे अविलंब शत प्रतिशत सुनिश्चित करने को कहा गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट शत प्रतिशत ऑनलाइन सुनिश्चित हो चुका है. जिलाधिकारी ने इस उपलब्धि के लिये सभी डॉक्टरों की सराहना की.

जिलाधिकारी द्वारा इसमें सर्वाधिक ऑनलाइन रिपोर्ट बनाने वाले 10 डॉक्टरों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जायेगा. भव्या पोर्टल पर दर्ज प्रविष्टि के अनुरूप जिला में ओपीडी में औसत प्रतीक्षा समय 26 मिनट है जिसे और भी कम करने का जिलाधिकारी ने निदेश दिया. ओपीडी में 98 प्रतिशत मामलों में वाईटल्स की प्रविष्टि भव्या पोर्टल पर सुनिश्चित की जा रही है. इसे शत प्रतिशत सुनिश्चित करने को कहा गया. संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी लाने के लिये सभी एमओआईसी को कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया. सिजेरियन डिलीवरी के लिये एनिस्थिसिया के डॉक्टर्स की प्रतिनियुक्ति / ऑन कॉल व्यवस्था सुनिश्चित कर अधिक से अधिक उपयुक्त अस्पतालों में सुविधा को क्रियाशील करने का निर्देश.

जिला में 600 नई ANM ने योगदान दिया है, इन सभी को फील्ड में पोस्ट किया गया है. इन सभी ANM का जिला स्तर पर बेहतर ओरिएंटेशन सह प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने का निर्देश. बैठक में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, जिला स्तरीय चिकित्सा पदाधिकारी, सभी एमओआईसी, बीएचएम, बीसीएम तथा विभिन्न सहयोगी संस्थाओं- WHO, पिरामल आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

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