न्याय के प्रहरियों का न्याय के लिए शंखनाद ; बिहार के सिविल कोर्ट कर्मचारियों ने फूंका आंदोलन का बिगुल

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PATNA DESK – बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का औपचारिक ऐलान कर दिया है. संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी के नेतृत्व में पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत पत्र भेजकर अधीनस्थ अदालतों में व्याप्त ‘घुटन और बेबसी’ की स्थिति से अवगत कराया गया है. संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी और महासचिव सत्यार्थ सिंह ने कहा कि अधीनस्थ अदालतों में कर्मचारी अमानवीय परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं.

पिछले दो दशकों से प्रोन्नति का न मिलना, वेतन विसंगतियां और पदों का वर्गीकरण न होना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है. अभिलेखों के अत्यधिक भार और संसाधनों की कमी ने न्यायिक कार्य को ‘मानसिक यातना’ बना दिया है. इसके अलावा, अनुकंपा नियुक्ति में हो रहे विलंब ने मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक बदहाली में झोंक दिया है.


​उच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद:
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विधि विभाग के पत्राचारों के अनुसार, वेतन और प्रोन्नति का मामला अब केवल माननीय उच्च न्यायालय के प्रशासनिक स्तर पर लंबित है. पूर्व के आश्वासनों पर ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में गहरा रोष है. विवश होकर संघ ने 01 मार्च से मौन सत्याग्रह और 06 अप्रैल से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है.

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