दानवीर शिरोमणि भामाशाह की जयंती से हमें त्याग व बलिदान की सीख लेनी चाहिए : विधायक, डॉ सीएन गुप्ता

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CHHAPRA DESK – सारण जिला वैश्य महासभा छपरा सारण ट्रस्ट के तत्वावधान में महान दानवीर शिरोमणि भामाशाह की जयंती धूमधाम से एक विवाह में मनाई गई. मौके पर दानवीर भामाशाह के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. कार्यक्रम का उद्धघाटन छपरा विधायक डाॅ सीएन गुप्ता, मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता, गंगोत्री प्रसाद अधिवक्ता, श्याम बिहारी अग्रवाल, राजेश फैशन, प्रदीप कुमार गुप्ता, राजेश कुमार, सुपन प्रसाद बिहारी, धर्मनाथ पिन्टु, ओम प्रकाश स्वर्णकार, राजु ब्याहुत ने दीप प्रज्जवलित कर किया.

छपरा विधायक ने अपने सम्बोधन में कहा कि भामाशाह अद्वितीय दानवीर एवं त्यागी महापुरुष थे. आत्म सम्मान और त्याग की यही भावना आपको स्वदेश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करने वाले देश-भक्त के रुप में शिखर पर स्थापित कर देती है. आज भी धन अर्पित करने वाले किसी भी दान दाता को भामाशाह कहकर उसका स्मरण-वंदन किया जाता है. भामाशाह अपनी दानवीरता के कारण इतिहास में अमर हो गए. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के बलिदान के साथ उनका दान अनंत काल तक अमर रहेगा. वहीं नगर निगम मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने कहा कि दानवीर भामाशाह का जन्म राजस्थान के मेवाड़ राज्य में 29 जून, 1547 को रणथम्भौर क़िले के क़िलेदार भारमल जी के यहां हुआ था.

जो राणा सांगा के विश्वासपात्र थे. अपने पूर्वजों की तरह भामाशाह भी मेवाड़ के राजा के सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार थे. अपरिग्रह को जीवन का मूलमंत्र मानकर संग्रहण की प्रवृत्ति से दूर रहने की चेतना जगाने में भामाशाह सदैव अग्रणी थे. उन्हें अपनी मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम था. दानवीरता में वे कर्ण के समान थे. वहीं श्याम बिहारी अग्रवाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम और दानवीरता के लिए भामाशाह का नाम इतिहास में अमर है. मातृ-भूमि की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप को उन्होंने अपनी सम्पूर्ण धन-संपदा अर्पित कर दी.

यह सहयोग तब दिया जब महाराणा प्रताप अपना अस्तित्व बनाए रखने के प्रयास में निराश होकर परिवार सहित पहाड़ियों में छिपते भटक रहे थे. मेवाड़ की अस्मिता की रक्षा के लिए दिल्ली गद्दी का प्रलोभन भी भामाशाह जी ने ठुकरा दिया था. महाराणा प्रताप को दी गई उनकी सहायता ने मेवाड़ के आत्म सम्मान एवं संघर्ष को नई दिशा दी. वहीं राजेश फैशन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा भामाशाह का निष्ठापूर्ण सहयोग महाराणा प्रताप के जीवन में महत्त्वपूर्ण और निर्णायक साबित हुआ था. मातृ-भूमि की रक्षा के लिए तथा महाराणा प्रताप का सर्वस्व होम हो जाने के बाद, उनके लक्ष्य को सर्वोपरि मानते हुए भामाशाह ने अपनी कमाई हुई सम्पूर्ण धन-संपदा के साथ अपने पूर्वजों के खजाने को भी महाराणा प्रताप कोअर्पित कर दिया था.

कार्यक्रम का संचालन श्याम बिहारी अग्रवाल ने किया. आगत अतिथियों का स्वागत प्रदीप कुमार गुप्ता ने किया. वहीं धन्यवाद ज्ञापन राजेश फैशन ने किया. कार्यक्रम को गंगोत्री प्रसाद अधिवक्ता, विष्णुदेव प्रसाद, ओमप्रकाश स्वर्णकार, अजीत स्वर्णकार, सुग्रीव प्रसाद गुप्त, सुजीत कुमार मोर, उमाशंकर साहु, संतोष कुमार डीओ, धर्मनाथ पिन्टु, राजेश नाथ प्रसाद, प्रो सिया शरण प्रसाद, भगवती प्रसाद जगाती आदि ने संबोधित किया. इस अवसर पर सैकड़ो वैश्यों ने उपस्थित होकर दानवीर भामाशाह को श्रद्धांजलि अर्पित किया.

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