हत्या मामले में मांझी विधायक सत्येंद्र को कोर्ट ने किया बरी ; विधायक ने कहा न्यायालय पर था भरोसा

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CHHAPRA COURT – सारण के मांझी विधायक सत्येंद्र यादव और उनके पांच सहयोगी जो कोपा थाना कांड संख्या 54 /2007 के सत्र वाद संख्या 552 A/ 2007 के अभियुक्त थे, उनको अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए नलिन कुमार पांडे के न्यायालय द्वारा संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया. विदित हो कि माझी थाना के ही सूचक गणेश सिंह ने अपने पुत्र तारकेश्वर सिंह की हत्या को लेकर मांझी के वर्तमान विधायक सत्येंद्र यादव, सुदामा साह, पूर्व मुखिया दिनेश पंडित, सुनील शाह, रघुवीर पंडित तथा राजेश राम के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी 2 जुलाई 2007 को दर्ज करवाई थी.

लगभग 16 साल के बाद इस मुकदमे में आज न्यायालय के द्वारा फैसला सुनाया गया और फैसले में न्यायाधीश ने संदेह का लाभ देते हुए सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया. इसके पहले दोनों पक्षों के बहस को सुनकर न्यायालय द्वारा सजा के बिंदु पर आज की तारीख निश्चित की गई थी. आज सुबह से ही छपरा व्यवहार न्यायालय परिसर में इस मुकदमे में क्या सजा सुनाई जानी थी जिसको लेकर काफी गहमा-गहमी की स्थिति थी. बड़ी संख्या में विधायक के समर्थक न्यायालय परिसर में जमा हो गए थे.

न्यायाधीश द्वारा लगभग 3:30 बजे अपना फैसला सुनाया गया. लेकिन सुबह 10:00 बजे से ही दोनों पक्षों के लोग न्यायालय परिसर में जमा हो गए थे और वे सजा के बिंदु पर न्यायाधीश क्या फैसला लेते हैं इसको जानने के लिए उत्सुक थे. अधिवक्ताओं के बीच भी इस मुकदमे को लेकर काफी चर्चा हो रही थी. बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और पक्षकारों का यह मानना था कि माझी विधायक को भी इस मुकदमे में कम से कम आजीवन कारावास की सजा होगी. क्योंकि, अभी कुछ दिनों पहले ही मांझी के पूर्व विधायक और मंत्री रविंद्र मिश्रा को हत्या के एक मामले में न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

इसीलिए यह कयास लगाया जा रहा था कि इस मामले में भी मांझी विधायक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाएगी लेकिन सारे कयासों को दरकिनार करते हुए न्यायाधीश ने इस मामले में वर्तमान विधायक को बरी कर दिया. न्यायालय में सजा के बिंदु के ऊपर सुनवाई के समय मांझी विधायक काफी निश्चिंत और शांत दिख रहे थे और उनके चेहरे पर कोई भी डर या चिंता का भाव नहीं दिख रहा था. वह आम मुकदमे की तरह इस मुकदमे की सुनवाई और सजा के फैसले को लेकर के चल रहे थे. न्यायालय परिसर में बहुत सारे अधिवक्ताओं और लोगों के बीच यह भी चर्चा चल रही थी कि मांझी विधायक के इस प्रकार से निश्चिंत देखने के पीछे कारण यह है कि उनके द्वारा अपने सत्ता पक्ष में रहने का और कुछ अन्य माध्यम से परिणाम को अपने पक्ष में करने के लिए कुछ सेटिंग भी किया गया है.

यह भी अफवाह पूरे न्यायालय परिसर में लगातार चल रही थी कि मांझी विधायक को सजा नहीं होगी क्योंकि इस मुकदमे में पैसे का बहुत बड़ा खेल हुआ है. सजा सुनाने के बाद पुनः लोग इस पर चर्चा परिचर्चा कर रहे थे, क्योंकि कुछ ही समय पहले जिस मुकदमे में पूर्व मंत्री और विधायक रविंद्र मिश्रा को सजा हुआ है, उस मुकदमे की अपेक्षा इस मुकदमे में ज्यादा गंभीरता और contest दिखाई दे रहा था. लेकिन, उसके बावजूद जब सजा का ऐलान हुआ तो बहुत सारे लोग यह कहते सुने गए कि हम लोग तो पहले से ही जानते थे कि इस मुकदमे में बहुत बड़ा खेला हो गया है

और इस खेला के बल पर ही सत्येंद्र यादव ना सिर्फ बरी हुआ है बल्कि उसने अपनी विधायकी की कुर्सी भी बचा ली है. क्योंकि, अगर इस मुकदमे में सत्येंद्र यादव को सजा होती तो उसे अपने विधायक की कुर्सी से भी हाथ धोना पड़ता. इस मुकदमे में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक ध्रुव देव सिंह, सूचक की ओर से हरिमोहन सिंह, अनिल सिंह और सत्येंद्र यादव की ओर से रमेश तिवारी और संतोष पांडे अधिवक्ता के रूप में केस देख रहे थे.

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