लिंगानुपात में विषमताओं का सबसे बड़ा कारण है सामाजिक मान्यता : सारण एडीएम

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CHHAPRA DESK – लिंगानुपात में विषमताओं का सबसे बड़ा कारण है सामाजिक मान्यता. माना जाता है कि बेटा ही मां-बाप का साथ देगा और बुढ़ापे का सहारा बनेगा. वही वंश को आगे बढ़ाएगा. विवाह के बाद बेटियां अपने घर से विदा हो जाती हैं. विवाह के बाद बेटियां कोई भी निर्णय ससुराल पक्ष से अनुमति लेकर ही करती हैं. ससुराल पक्ष मां-बाप की संपत्ति पर बेटी के अधिकार को तो समझता है, लेकिन उनकी सेवा को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानता. अगर हम लिंगानुपात को सुधारना चाहते हैं, तो यह मान्यता बदलनी होगी. बेटियों को भी मां-बाप की सेवा के लिए तैयार रहना चाहिए. यह बातें एडीएम डॉ गगन ने गड़खा प्रखंड परिसर में लिंगानुपात बढ़ाने को ले आयोजित बैठक में कही. उन्होंने बताया कि सारण जिले में एक हजार पुरुषों पर 898 महिला मतदाता हैं. जबकि यहां जनसंख्या के आधार पर एक पुरुष पर 954 महिला है. इस आंकड़े पर ध्यान दिया जाए तो प्रति हजार पर 56 महिला वोटर कम है. इस लिंगानुपात को बराबर करने के लिए जिला निर्वाचन शाखा ने जिलाधिकारी राजेश मीणा के नेतृत्व में अपना अभियान अब तेज कर दिया है. गड़खा में लिंगानुपात 875 है. ऐसे में हमें जागरूक होने की जरूरत है. एडीएम ने यह भी कहा कि वर्तमान में समय में शिक्षा और साक्षरता के ग्राफ में लगातार वृद्धि होती जा रही है. फिर भी लिंगभेद की समस्या बनी हुई है. शिक्षा के प्रभाव के कारण ‘हम दो, हमारे दो का माहौल बना हैै, लेकिन लिंगानुपात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. यह चिंताजनक स्थिति है. बैठक में शामिल पदाधिकारियों ने कहा कि लिंगानुपात में सुधार के लिए जन जागरूकता का सघन अभियान चलाया जाए. कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में लोगों की नकारात्मक मनोवृत्ति बदलने का प्रयास करें। साथ ही सरकार ऐसी योजनाएं चलाए, जिससे इसमें सुधार हो.

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