‘जन सुराज’ की सोच के साथ अब तक 9 जिलों में जा चुके हैं प्रशांत किशोर ; समाज के सभी वर्ग के लोगों का मिल रहा समर्थन

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CHHAPRA DESK – सालों तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके प्रशांत किशोर इन दिनों जेठ और आषाढ़ की तपतपाती धूप और उमस भरी गर्मी में बिहार के अलग-अलग जिलों में जा रहे हैं. 5 मई को ‘जन सुराज’ अभियान की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर जन सुराज की सोच के साथ बिहार के लोगों के साथ लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं. उनकी योजना है कि 2 अक्तूबर से प्रस्तावित पदयात्रा से पहले हर उस व्यक्ति, संगठन और समूहों से मिलने का प्रयास किया जाए जो जन सुराज की सोच को समझना चाहते हैं और बिहार की बेहतरी के लिए कुछ करना चाहते हैं.

क्या है ‘जन सुराज’?

प्रशांत किशोर के कार्यक्रम को अगर देखेंगे तो वो सामान्य तौर पर होने वाले किसी नेता के कार्यक्रम से बहुत अलग होता है. ये कार्यक्रम वहां के स्थानीय लोग आयोजित करते हैं और प्रशांत किशोर को बुलाते हैं. प्रशांत किशोर कार्यक्रम की शुरुआत आमतौर पर अपने परिचय से करते हैं और लोगों को जन सुराज की सोच के बारे में विस्तार से बताते हैं. जन सुराज की सोच के बारे में जानकारी देते हुए वे कहते हैं कि इस अभियान का उद्देश्य किसी दल के लिए कार्यकर्ता खोजना नहीं है, इसका उद्देश्य एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनना है और उसके लिए संस्थापक खोजना है.

प्रशांत किशोर अपने संबोधन में ‘सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास’ के नारे पर जोर देते हुए कहते हैं कि यह अभियान सही लोगों को खोजने का है, इसीलिए समाज में घूम रहे हैं. समाज को मथने से ही सही लोगों का चुनाव संभव है. सही सोच का मतलब वो बताते हैं कि वैसे लोग जो बिहार की खुशहाली और बेहतरी में अपनी खुशहाली और बेहतरी देखते हों, जो सचमुच चाहते हों की बिहार भी विकास के सभी मापदंडों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो और बिहार के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ सेवाओं के लिए पलायन नहीं करना पड़े, और इन सब के लिए सामूहिक प्रयास ही एकमात्र रास्ता है.

प्रशांत किशोर कहते हैं, “अगर कोई व्यक्ति या दल ये समझता है कि वो अकेले बिहार में परिवर्तन ला सकता है तो ये गलत है, किसी भी बदलाव के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत होती है और जब सही लोग सही सोच के साथ सामूहिक प्रयास करेंगे तभी बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल कराया जा सकता है.  प्रशांत किशोर के कार्यक्रमों की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि वो जितना समय अपने संबोधन में लगाते हैं उससे ज्यादा समय लोगों के सवालों का जवाब देते हैं.  कार्यक्रम में शामिल कोई भी व्यक्ति प्रशांत किशोर से किसी भी तरह का सवाल पूछ सकता है और प्रशांत सभी के सवालों का जवाब देते हैं और सबको संतुष्ट करने का प्रयास करते हैं.

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