छपरा में जहरीली शराब से एक दर्जन मौतों का जिम्मेवार कौन ? कौन लौटाएगा मजदूरों के आंखों की रोशनी ?

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Chhapra Desk-  बीते दिनों बिहारशरीफ में जहरीली शराब से 13 मौतों के बाद अब छपरा में भी जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है. अब तक जिले के मकेर एवं अमनौर क्षेत्रों मैं शराब पीने से करीब एक दर्जन मौतें हो चुकी है. जिसमें एक मजदूर सिवान जिले का भी रहने वाला था. बताया जाता है कि प्रारंभ में तो लोगों ने डर के मारे कुछ शवों का दाह संस्कार कर दिया, लेकिन जैसे ही यह बात सामने आई जिला प्रशासन के द्वारा करीब आधा दर्जन शव को कब्जे में लेकर छपरा सदर अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया. क्योंकि, उनके परिजनों का आरोप था कि मौत का कारण जहरीली शराब ही है. वहीं इस बाबत सारण जिला अधिकारी राजेश मीणा एवं एसपी संतोष कुमार के द्वारा समाहरणालय सभागार में बीते दिनों प्रेस वार्ता कर इस बात का खंडन किया गया और सभी मौतों को संदिग्ध बताया गया. उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. लेकिन यह मामला फिर एक बार उस समय ताजा हो गया जब तीसरे दिन मकेर थाना क्षेत्र के तारा अमनौर गांव निवासी जगरनाथ सिंह का 36 वर्षीय पुत्र अंजय सिंह शराब पीने से आंखों की रोशनी गंवानेने के बाद छपरा सदर अस्पताल में पहुंचा.

उसके द्वारा बताया गया कि जगदीशपुर बाजार पर ही उसके द्वारा मुन्ना महतो से देसी शराब खरीद कर पिया गया था. जिसके बाद बीते दिन उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा और जब वह उपचार के लिए मकेर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा तो वहां से उसे गंभीर स्थिति में छपरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया जहां चिकित्सकों के द्वारा जांच उपरांत पाया गया कि उसके आंखों की रोशनी जा चुकी है. इस घटना के बाद परिवार वालों में जहां कोहराम मचा हुआ है. वहीं परिवार वालों के सामने एक बड़ी समस्या यह उत्पन्न हो गई है कि परिवार वालों की रोजी रोटी कैसे चलेगी. क्योंकि घर का वह कमाऊ सदस्य था और मजदूरी कर परिवार का लालन पालन करता था. इस प्रकार पुलिस छपरा जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों को भले ही संदिग्ध मान गई है, लेकिन मृतकों के परिजन एवं जहरीली शराब के कारण अपनी आंखों की रोशनी गंवा चुके मजदूरों की बात को भी इनकार नहीं किया जा सकता है. जिनके द्वारा जहरीली शराब पिए जाने की बात कही जा रही है.

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