शराबबंदी के बाद पुलिस कस्टडी में हो रही शराबियों की मौत और नशा मुक्ति वार्ड में लटक रहा ताला ; लाखों की लागत के बाद ही पड़ा है बेकार

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CHHAPRA DESK – बिहार में शराबबंदी के बाद वैसे शराबियों जो कि शराब के बिना नहीं रह सकते, उनके लिए सरकार के द्वारा छपरा सदर अस्पताल में नशामुक्ति वार्ड की स्थापना की गई. इसके लिए सदर अस्पताल स्थित इमरजेंसी वार्ड के प्रथम माले पर लाखों रुपए की लागत से नशा मुक्ति वार्ड का शुभारंभ किया गया. जिसमें शराबियों को इलाज के साथ उस कक्ष में डिस कनेक्शन के साथ टेलीविजन और एयर कंडीशन मशीन लगाया गया  ताकि, वहां शराबियों का अच्छी तरह से मनोरंजन के साथ उनका उपचार किया जा सके और उनकी नशे की लत को छुराया जा सके. प्रारंभ में तो नशा मुक्ति वार्ड में मरीज भर्ती हुए लेकिन कुछ महीनों के बाद इस वार्ड में सन्नाटा पसर गया.

क्योंकि कोई शराबी भर्ती होना नहीं चाह रहा था। वहीं भर्ती किए गए नशेड़ी निकल कर भाग जाते थे. जिसके कारण नशा मुक्ति वार्ड सरकार के मकसद को पूरा करने में सफल नहीं हो सका और इसे बंद कर दिया गया। जिसके बाद यह वार्ड आज तक बंद पड़ा हुआ है और इसके मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा है. जबकि शराबी और शराब धंधेबाजो की जिला प्रशासन के द्वारा लगातार गिरफ्तारी की जा रही है.

ऐसी स्थिति में शराब के बिना नहीं रह पाने वाले वैसे शराबियों को बचा पाना पुलिस के लिए भी परेशानी का सबब बन गया है. जिससे जिले में वैसे शराबियों की लगातार मौतें हो रही है. वही बीते दिन ऐसे ही एक शराबी कैदी को मंडल कारा से छपरा सदर अस्पताल भर्ती किया गया लेकिन दिनभर उपचार के बाद कोई सुधार नहीं होने के बाद उसे रात्रि में बेहतर चिकित्सा के लिए पीएमसीएच रेफर किया गया.

नशा मुक्ति केंद्र से नशेड़ियों को मिल सकता है जीवनदान, अस्पताल में 9 मरीज अभी भी है भर्ती

शराब के बिना नहीं रह पाने वाले वैसे लोगों को नशा मुक्ति वार्ड में भर्ती कर चिकित्सक के द्वारा उनका उपचार किया जाता है. जिसके कारण उनकी नशे की लत धीरे-धीरे छूटती है.
बता दें कि छपरा सदर अस्पताल में ऐसे 9 कैदी अभी भी भर्ती हैं. जिन्हें पुलिस द्वारा पकड़कर मंडल कारा तो भेजा गया लेकिन मंडल कारा में जांच के दौरान पाया गया कि वे अल्कोहलिक हैं और उनके हाथ पैर में कंपन हैं. जिसके बाद उन्हें छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सदर अस्पताल में भर्ती 9 कैदियों में अभी भी दो कैदी पूरी तरह अल्कोहलिक है. जबकि सात कैदी में ट्रैंबलिंग की बीमारी है.

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