छपरा नगर निगम बोर्ड की बैठक में जमकर हुआ हंगामा ; हंगामा व हाथापाई के बीच चली कुर्सियां भी

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CHHAPRA DESK –  छपरा नगर निगम के बोर्ड की बैठक काफी हंगामेदार रही. देखते ही देखते बैठक के दौरान कुर्सियां चलने लगी और इस हंगामा में जमकर मारपीट हुई. बोर्ड की बैठक शुरू होते ही पार्षद रमाकांत सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने कई मुद्दे उठाए जो पिछले बैठक में मुख्य मुद्दा बना था और उसे पर सहमति भी बनी थी. जिसके बाद सवाल जवाब का दौर शुरू हुआ और पिछले बैठक में एजेंसियों के मनमानी पर जो सवाल उठाए गए थे उन सवालों का जवाब मेयर से मांगा गया. तब उनके द्वारा सवालों का कोई जवाब नहीं दिया गया तथा पिछले बैठक में एक करोड रुपए सभी वार्डों के विकास के लिए देने की बात हुई थी उसे पर भी मेयर का जवाब स्पष्ट नहीं था.

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वहीं एक सवाल के जवाब में मेयर ने कहा कि सफाई एजेंसियों और अन्य एजेंसियो का पेमेंट वह खुद करेंगे. इस पर वार्ड पार्षदों ने जमकर विरोध किया उन्होंने कहा कि सफाई एजेंसियां और अन्य एजेंसियां हमारी बात नहीं सुनेगी इसी बात पर हंगामा और मारपीट शुरू हो गया. जिसमें जमकर कुर्सियां चली और कई कुर्सियां टूटी. वार्ड पार्षदों ने बताया कि नगर निगम के बोर्ड की साधारण बैठक महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता की अध्यक्षता में शुरू हुई. जिसमें विगत 20 सितंबर 24 को हुई बोर्ड के बैठक एवं 19 नवंबर 24 को सम्पन्न सशक्त के बैठक की संपुष्टि के बाद वित्तीय मामले की महापौर द्वारा खुद समीक्षा करने की बात के बाद पार्षदों एवं महापौर के बीच विवाद शुरू हो गया.

बात तू-तू, मै-मै के बाद एक दुसरे पर कुर्सी फेंकने और कुर्सी से मारपीट के बाद हाथापाई की स्थिति आ गई. वहीं वित्तीय मामले में वार्ड पार्षद श्वेता पांडेय ने बिहार नगर पालिका अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय मामले की समीक्षा करने का अधिकार महापौर को नहीं है. इसके बाद भी विवाद और बढ़ गया. मेयर समर्थक पार्षद एवं विपक्षी पार्षद आपस में भिड़ गये. फिर क्या था. पार्षद एक दूसरे पर कुर्सी फेंकने लगे मेंज भी पलट दिया‌. सभागार में अफरा -तफरी की स्थिति हो गई. महिला पार्षद की जान बचाकर भागने लगी.

महिला पार्षदों के पति एवं परिजन भी सभागार में घुस गये. उस दौरान कुछ पार्षद मेयर के साथ तू-तू, मैं-मैं करने के साथ मेयर के साथ धक्का-मुक्की एवं हाथापाई भी करने लगे. हंगामा के बाद कुछ पार्षद किसी तरह से मामले को शांत करा कर पार्षद को सभागार से बाहर निकाला. इस संबंध में पूछे जाने पर मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने कहा कि शहर में चल रहे निर्माण में गुणवत्ता की मानिटरिंग की मुद्दा जब उठाया गया तो कुछ वार्ड पार्षद जो खुद ठेकेदारी करते हैं, उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया.

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