गंडक नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

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CHHAPRA DESK – सारण जिले में पिछले तीन दिनों से गंडक नदी के जलस्तर में कमी होने के बाद एक बार फिर बढ़ते जलस्तर ने सारण तटबंध के निचले इलाकों में बसे लोगो की परेशानी बढ़ा दी है. एक सप्ताह पूर्व बाढ़ की आशंका से सहमे पृथ्वीपुर, सोनवर्षा, बसहिया, रामपुररुद्र आदि गांवों के निवासी जलस्तर में कमी से राहत महसूस कर रहे थे लेकिन गंडक के जलस्तर में फिर हो रही वृद्धि ने उनकी चिंता फिर बढ़ा दी है. सारण तटबंध के निचले इलाकों के ग्रामीणों ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व आये पानी से इसबार ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो गयी है.

वहीं जल संसाधन विभाग के एसडीओ कमलेश कुमार ने बताया कि वाल्मीकिनगर बराज से डिस्चार्ज पानी के लेवल में बढ़ोतरी के बाद रविवार से फिर कमी हो गयी है जिससे अगले 24 घंटे के बाद जलस्तर में कमी होने लगेगी. उन्होंने बताया कि जल संसाधन विभाग के पदाधिकारियों एवं  कर्मियों द्वारा सारण तटबंध की सतत निगरानी की जा रही है। लोगो को घबराने की जरूरत नही है. वहीं मांझी स्थित सरयू नदी में अचानक आये उफान के बाद मांझी प्रखंड के छोटकी फुलवरिया गांव स्थित देवी स्थान से लेकर डोमावीर तक लगभग एक किमी की दूरी तक जबरदस्त कटाव शुरू हो गया है.

कटाव की वजह से पिछले पांच दिनों के भीतर दस एकड़ से अधिक की परवल लगी भूमि सरयू में विलीन हो चुकी हैं. ग्रामीणों ने बताया कि तीब्र गति से हो रहे कटाव के कारण नदी की तेज धारा अब बांध से महज 20 से पच्चीस फुट की दूरी तक आ पहुंची चुकी है. तेजी से हो रहे कटाव की वजह से गांव के लोग दहशत में हैं. लोगों ने बताया कि कटाव स्थल पर बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा पेड़ की डाली आदि डालकर कटाव रोकने की मात्र खानापूर्ति की जा रही है. ग्रामीणों ने बताया कि मिट्टी भरी बोरी डालकर कटाव पर तत्काल काबू पाया जा सकता है.

ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि समय रहते कटाव को नही रोका गया तो दो चार दिनों के भीतर बाढ़ रोकने के उद्देश्य से बना बांध खुद ही नदी में ध्वस्त होकर विलीन हो जाएगा. लोगों का अनुमान है कि कटाव की कहर से यदि बांध को बचाया नहीं गया तो उसके ध्वस्त हो जाने के बाद सरयू का पानी प्रखंड के दर्जनों गांवों में आसानी से प्रवेश कर जाएगा तथा उन गांवों में भयंकर तबाही मच जाएगी.

इस बीच जदयू नेता निरंजन सिंह ने आरोप लगाया है कि बाढ़ से पहले कटाव रोकने की दिशा में विभागीय एसडीओ तथा जेई ने किसी भी तरह की कोई ठोस पहल नही की और अब जब सरयू का कटाव परवान पर है तब पेड़ की डाली पानी में डालकर कटाव रोकने की मात्र खानापूर्ति की जा रही है. उन्होंने कटाव रोकने हेतु विभागीय स्तर पर किये जा रहे प्रयास तथा कथित रूप से राशि की लूट खसोट की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

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