यहां अज्ञात श’व में पड़ जाते हैं की’ड़े ; पोस्टमार्टम कक्ष में नहीं है वातानुकूलित मु’र्दाघर पर उपाधीक्षक हैं अनजान

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CHHAPRA DESK – यहां अज्ञात शवों के साथ अन्याय ही होता है. क्योंकि, यह है छपरा सदर अस्पताल का वातानुकूलित रहित पोस्टमार्टम कक्ष और मुर्दाघर. जी हां, पोस्टमार्टम कक्ष और मुर्दाघर वातानुकूलित होता है लेकिन छपरा सदर अस्पताल में वर्षों बीतने के बाद भी यह मुर्दाघर वातानुक्कृत नहीं हो सका है. इस पोस्टमार्टम कक्ष में कहीं भी एयर कंडीशनर नहीं लगा हुआ है. मुर्दा रखने की व्यवस्था ऐसी है कि आए दिन दो-तीन मुर्दा बंद कमरे में ऐसे ही रखे जाते हैं. क्योंकि, इस पोस्टमार्टम कक्ष में शव रखने के लिए दो ही एयकंडीशन बाक्स है.जबकि आजकल प्रतिदिन ट्रेन से कटे अथवा दुर्घटना में अज्ञात शव प्राप्त हो रहे हैं. आज भी छपरा जंक्शन से एक शव पोस्टमार्टम के बाद मुर्दा घर में रखा गया, जबकि पहले से वहां तीन शव रखे हुए थे. जिसमें दो शव एयर कंडीशन बॉक्स में रखा गया था.

यहां बता दे कि सभी अज्ञात शवों को जिला प्रशासन के द्वारा 72 घंटे तक सुरक्षित रखा जाता है, ताकि शवों की शिनाख्त हो सके. ऐसी स्थिति में सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष में शव रखने के लिए दो ही एयर कंडीशन बॉक्स होने के कारण अन्य शवों को कमरे में बंद कर ऐसे ही रखा जाता है. ऐसी स्थिति में 72 घंटे तक होते-होते बंद कमरे में रखा गया शव भयंकर गर्मी के कारण सड़-गल जाता है और उसमें कीड़े भी लग जाते हैं. लेकिन अस्पताल प्रशासन का इसकी तरफ बिल्कुल ही ध्यान नहीं है. ऐसी स्थिति में यहां मुर्दों के साथ अन्याय नहीं तो और क्या होता है?

अस्पताल उपाधीक्षक को नहीं है जानकारी

इस विषय पर जब हलचल न्यूज़ ने अस्पताल उपाधीक्षक डॉक्टर आर एन तिवारी ने बताया कि मुर्दाघर वातानुकूलित है. लेकिन जब हलचल न्यूज़ के द्वारा उन्हें बताया गया कि मुर्दाघर वातानुकुलित नहीं है तो उन्होंने बताया कि उसमें मुर्दा रखने के लिए दो वातानुकूलित यंत्र लगाया गया है. इसलिए कहीं कोई समस्या नहीं है. जबकि प्रतिदिन इसके अलावा दो-तीन शव को बंद कमरे में ऐसे ही रखा जाता है.

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