102 एंबुलेंस का कमाल : द’लाल से मिलकर सदर अस्पताल की बजाए प्रसव पीड़िता को पहुंचा दिया फ’र्जी प्राइवेट अस्पताल, फिर…

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CHHAPRA DESK – 102 एंबुलेंस चालक और दलालों की सांठगांठ के बाद प्रसव पीड़िता छपरा सदर अस्पताल पहुंचते-पहुंचते एक फर्जी अस्पताल पहुंच गई. जहां उससे हजारों रुपए ऐंठ लिए गए. दरअसल यह अस्पताल जिला प्रशासन के द्वारा पूर्व में बंद करा दिया गया था. जिसके बाद इसका नाम बदलकर चलाया जा रहा है. पूरा मामला छपरा शहर के दहियांवा स्टेडियम के समीप स्थित ए-वन इमरजेंसी हॉस्पिटल का है. बताते चलें कि मशरक थाना क्षेत्र के जजौली मठिया निवासी मुन्ना कुमार की पत्नी ब्यूटी देवी को प्रसूति दर्द हुआ. जिसके बाद उसके परिजनों ने उसे मशरक पीएचसी ले जाकर इलाज कराया, जहां से गर्भवती महिला को सदर अस्पताल छपरा रेफर कर दिया गया. वहीं इसी बीच सरकारी एम्बुलेंस 102 से उसे सदर अस्पताल लाने के क्रम में ही एंबुलेंस चालक व अस्पताल में मौजूद दलालों के द्वारा निजी क्लीनिक में रेफर करने की बात कर सेटिंग कर ली गई. इसी क्रम में मरीज़ एम्बुलेंस से सदर अस्पताल भी नहीं पहुंचा कि अस्पताल के बाहर से ही दलालों के द्वारा उसे शहर के ही एक निजी क्लीनिक में ले जाकर भर्ती करा दिया गया. वही महिला का प्रस्तुति सही सलामत निजी क्लीनिक में हुआ. बच्चे के जन्म लेने के बाद स्थिति सही नहीं थी. जिसके बाद निजी क्लीनिक के चिकित्सक के द्वारा उसे सदर अस्पताल के एसएनसीयू में रेफर कर दिया गया. जहां बच्चे का इलाज चल रहा है. वहीं अस्पताल में पीड़ित ने बताया कि निजी क्लीनिक में ले जाने के लिए हम लोगों को बाहर से ही एम्बुलेंस से दूसरे एम्बुलेंस से स्टेडियम के समीप निजी क्लिनिक ए-वन इमरजेंसी हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया.

 

 

साथ ही जब सब कुछ सही सलामत हो गया तो उसे ₹48 हजार की मांग क्लीनिक के कर्मियों के द्वारा की गई. जिसके बाद उक्त मरीज के परिजन हतप्रभ हो गए. वहीं अस्पताल में रो-रो कर वह अपनी व्यथा बतते हुए कहा कि हम गरीबों के पास इतने पैसे कहां से आएंगे. हालांकि प्रसव उपरांत वह महिला अभी भी उसी अस्पताल में भर्ती है. जबकि बच्चे को छपरा सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां प्रसव पीड़िता के परिवार वालों ने रो-रो कर अपनी व्यथा सुनाई है कि 102 एंबुलेंस चालक और दलालों की सांठगांठ से उन्हें प्राइवेट अस्पताल पहुंचा दिया. अब वे इतने पैसे कहां से लाएंगे और कहां से देंगे.

 

24 अप्रैल को भी ए-वन इमरजेंसी हॉस्पिटल पर हुआ था हंगामा

बता दें कि सदर अस्पताल पहुंचते-पहुंचते अनेक मरीज किसी निजी अस्पताल पहुंच जा रहे हैं. जिसमें कहीं ना कहीं अस्पताल प्रशासन की निष्क्रियता भी है. क्योंकि गरीब और कम पढ़े लिखे मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले लोग नहीं समझ पाते कि कौन अस्पताल कर्मी है और कौन एजेंट. बीते 24 अप्रैल को भी एक मरीज 14 वर्षीय अर्जुन कुमार को गिरने के कारण नाक में जख्म होने पर सदर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां से उक्त नर्सिंग होम का दलाल उसे लेकर वहां पहुंचा दिया. जहां रात भर में उसे मरीज को ₹20000 का बिल थमा दिया गया था. बिल का भुगतान नहीं करने पर मरीज को वहां बंधक ही बनाया गया था. लेकिन हो-हंगामा पर मामला ₹9000 में रफादफा किया गया था. जिसके बाद मरीज पुनः सदर अस्पताल पहुंचा और वहां उस मरीज का उपचार किया गया था.

 

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